कोरोना संकट के दौरान पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफ़ान पठान ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की मदद में लगे हुए हैं. इस बीच इरफ़ान एक ऐसे शख़्स की मदद के लिए आगे आए हैं जो पिछले 27 सालों से भारतीय क्रिकेटरों के जूते सिलने का काम कर रहे हैं, लेकिन इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं.

दरअसल, हाल में इरफ़ान को एक क्रिकेट मैगज़ीन में छपी रिपोर्ट से पता चला कि 'चेन्नई सुपर किंग्स' के लिए आधिकारिक तौर पर जूते सिलने का काम करने वाले आर. भास्करन कोरोना संकट के चलते आर्थिक तंगी से परेशान हैं. इसके बाद इरफ़ान ने 25 हज़ार रुपये देकर भास्करन की मदद की. इसकी जानकारी ख़ुद मैगज़ीन ने दी है.

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रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 1993 के बाद से चेन्नई में जितने भी अंतरराष्ट्रीय मैच खेले गए भास्करन इसके गवाह रहे हैं. पिछले 12 सालों से वो 'चेन्नई सुपर किंग्स' के लिए आधिकारिक जूते सिलने का काम कर रहे हैं. फ़िलहाल वो चिदंबरम स्टेडियम के बाहर वल्लाजाह रोड की फ़ुटपाथ पर बैठकर जूते सिलने का काम करते हैं. 

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रिपोर्ट में बताया गया है कि, चेन्नई में होने वाले मैचों के दौरान भास्करन खिलाड़ियों व मैच अधिकारियों के आस-पास ही एक छोटे से कमरे में बैठ जाते हैं. आईपीएल अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और कोरोना वायरस के कारण भास्करन को परिवार चलाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.   

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असोसिएशन से मिलते थे 1000 रुपये 

रिपोर्ट के मुताबिक़, तमिलनाडु क्रिकेट असोसिएशन (टीएनसीए) भास्करन को 1 दिन के काम के लिए 1000 रुपये देता है. इसके अलावा खिलाड़ी और अधिकारी भी उन्हें अलग से पैसे देते हैं. जब मैच नहीं होते थे तो वो दिन के 300 से लेकर 500 रुपये तक कमा लेते थे, लेकिन कोरोना संकट के चलते वो इन दिनों प्रतिदिन 150 रुपये भी नहीं कमा पा रहे हैं. 

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सचिन के पैड व जूते भी किए थे ठीक 

रिपोर्ट में बताया है कि, भास्करन ने कई साल पहले सचिन तेंदुलकर के पैड व जूते भी ठीक किए थे. भास्कर ने कहा कि, सचिन के पैड आजकल के सिंथैटिक पैड की तरह नहीं थे, वो काफ़ी अलग हुआ करते थे. जब मैंने उनके पैड ठीक किए तो उन्होंने मेरे परिवार से मुलाक़ात की और IPL टिकट भी दिलाए थे.  

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'मैंने महेंद्र सिंह धोनी को पहली बार साल 2005 से देखा था, जब वो मैच खेलने चेपॉक आए थे. इस दौरान उन्होंने मेरे साथ चाय भी पी थी. वो मुझसे कहते कि मैं उनसे तमिल में बात करूं, धोनी मुझे 'माछी' बुलाते हैं, जिसका मतलब भाई होता है. हम दोस्त की तरह बात करते हैं'. 

ये इरफ़ान पठान की दरियादिली ही है कि, वो सकंट की इस घड़ी में भास्करन की मदद के लिए आगे आये हैं.