जब आंख खुली तो सिर पर ख़ुद की छत नहीं, क्रिकेट खेलना शुरू किया तो पैरों में जूते नहीं, पिता का सपना पूरा किया तो उसे साकार होते देखने के लिए पिता नहीं... ये कहानी है ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ टेस्ट सीरीज़ में भारत के लिए सर्वाधिक 13 विकेट लेने वाले मोहम्मद सिराज की.

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सिराज का जन्म 1994 में हैदराबाद के फ़र्स्ट लांसर इलाक़े में एक किराए के मकान में हुआ था. पिता मोहम्मद गौस एक ऑटो-रिक्शा चलाते थे. सिराज के भाई इस्माइल उनके पिता की मदद करते थे. 

सिराज की ज़िंदगी का सफ़र चल पड़ा था, पर उनका अभी पैरों पर खड़े होना बाक़ी था. ऐसे में एक छोटे से घर में बड़े सपने लिए सिराज स्थानीय ईदगाह मैदान पहुंच गए. ज़िंदगी में जहां अब तक सबकुछ हारा नज़र आता था, मैदान के अंदर कुछ जीतने की उम्मीद पैदा होने लगी. 

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सिराज के पैरों में जूते नहीं थे, पर उनकी मंज़िल भी कहां जूतों की मोहताज थी. वो नंगे पांव ही मैदान पर एड़ियां घिसकर ख़ुद को तराशते रहे. सिराज हर रोज़ यहां गेंदबाज़ी करते और उनके पैर मिट्टी से सन जाते. किसे पता था कि कल यही मिट्टी सिराज की ज़िंदगी में सोना उगलेगी.

सिराज के हालात ऐसे नहीं थे कि वो क्रिकेट की कोई औपचारिक ट्रेनिंग ले पाते. वो घर के नज़दीकी मैदान में कैनवास गेंद से ट्रेनिंग करने लगे. वैसे तो सिराज की ख़्वाहिश बैट्समैन बनने की थी, पर क़िस्मत उन्हें एक बेहतरीन बॉलर बनने के लिए तैयार कर रही थी. अपने दोस्तों के कहने पर वो घरेलू टूर्नामेंट में टेनिस गेंद से खेलने लगे और देखते ही देखते गेंदबाज़ी में उनका नाम होने लगा. 

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दोस्तों के ही कहने पर सिराज ने पहले हैदराबाद में लीग टूर्नामेंट में भाग लिया और बाद में कई घरेलू क्रिकेट क्लबों के साथ खेलना शुरू कर दिया. इस दौरान वो लगातार अपनी प्रतिभा को निखारते रहे. फिर आया वो दिन, जिसकी उम्मीद शायद सिराज ने भी नहीं की थी. उन्हें 2015-16‌ के रणजी सीजऩ में हैदराबाद के लिए प्रथम श्रेणी में डेब्यू करने का मौक़ा मिला.

इसके बाद सिराज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने आगे विजय हज़ारे ट्रॉफी में शिरकत की. फिर हैदराबाद की अंडर-23 टीम के लिए भी क्रिकेट खेला. IPL में सिराज रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की टीम से खेलते हैं. इससे पहले वो सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) टीम में भी रह चुके थे.

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2017 में सिराज का चयन भारतीय टी20 टीम में हुआ, लेकिन उनके पिता का सपना उन्हें टेस्ट टीम में खेलते देखने का था. सिराज के बड़े भाई इस्माइल ने बताया कि उनके पिता टेस्ट क्रिकेट के बड़े प्रशंसक थे. वो सिराज को भी टेस्ट क्रिकेट में खेलता देखना चाहते थे.

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पिछले साल नवंबर में वो दिन भी आ गया, जब सिराज के पिता का सपना हक़ीक़त बन गया. चार मैचों की टेस्ट सीरीज़ के लिए भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया पहुंच गई. मग़र अभी एक हफ़्ता ही बीता था कि 20 नवंबर को उनके पिता के निधन की ख़बर आ गई. अपने बेटे को भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलते देखने की हसरत लिए मोहम्मद सिराज के वालिद चल बसे.

कोरोना प्रोटोकॉल के कारण सिराज अंतिम संस्कार के लिए लौट भी नहीं सके. हालांकि, BCCI ने उन्हें घर लौटने का विकल्प दिया था, पर सिराज ने ऑस्ट्रेलिया में ही रूक कर पिता का सपना साकार करने का फ़ैसला किया. उन्होंने कहा, 'मेरे पिता मुझे सबसे ज़्यादा सपोर्ट करते थे. ये मेरे लिए बहुत बड़ी क्षति है. उनका सपना था कि मैं भारत के लिए टेस्ट खेलूं और अपने देश का नाम रौशन करूं.'

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अग़र आज सिराज के पिता ज़िंदा होते तो उन्हें मेलबर्न के बॉक्सिंग डे टेस्ट में डेब्यू करते देख पाते. वो देख पाते कि कैसे गाबा में सिराज ने 5 विकेट चटका कर भारतीय टीम की जीत की बुनियाद रखी. वो देख पाते कि उनका बेटा उन 5 भारतीय गेंदबाज़ों में से एक हैं, जिन्होंने गाबा में 5 विकेट हासिल किए हैं. वो देख पाते अपने उस बेटे के पैरों को जिसमें आज जूते भी हैं, और उनके नीचे ऑस्ट्रिलयाई टीम का गुरुर भी.