आप अनिल कुंबले के एक पारी में दसों विकेट लेने के रिकॉर्ड को जानते होंगे. लेकिन इसके पहले भी एक भारतीय था, जिसने एक पारी में 9 विकेट लिए थे और रिकॉर्ड बनाया था.

जसु पटेल का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बहुत बड़ा नहीं था. लेकिन छोटे से ही अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने छाप छोड़ दिया. 7 मैचों के टेस्ट मैच में ही एक मैच उन्होंने ऐसा खेला कि उसे 'पटेल टेस्ट मैच' के नाम से जाना जाता है.

Source: Sport Keeda

बचपन में पेड़ से गिर जाने के वजह से उनका हाथ टूट गया था. जिसकी वजह से उनकी बॉलिंग एक्शन भी आम नहीं था, उनकी बॉलिंग एक्शन को जर्की माना जाता था. इस वजह से भी बॉलिंग के दौरान वो ऑफ़ कटर का ज़्यादा इस्तेमाल किया करते थे न की पारंपरिक ऑफ़ ब्रेक की.

साल 1943-44 में उनके फ़र्स्ट क्लास करियर की शुरुआत हुई थी. पहले मैच में ही उन्होंने 3 विकेट चटकाए. वो लगातार गुजरात की ओर से प्रथम श्रेणी मैच खेलते रहते थे.

1955 में उन्हें भारत की ओर से टेस्ट मैच खेलने का न्योता दिया गया. उससे पहले वो पाकिस्तान विश्वविद्यालय के ख़िलाफ़ खेलते हुए 47 रन देकर 12 विकेट चटकाए थे.

पटेल टेस्ट मैच

'पटेल टेस्ट' जिसकी हम बात कर रहे थे, कानपूर में खेला गया था. ऑस्ट्रेलिया पहले से एक मैच जीत कर श्रृंखिला में आगे चल रहा था. दूसरे टेस्ट में भी उसकी स्थिति मजबूत थी. पहले बैटिंग भारत ने की थी और स्कोर बोर्ड पर 152 रन खड़े किए थे.

दूसरे दिन बैटिंग करते हुए लंच तक ऑस्ट्रेलिया 1 विकेट के नुकसान पर 128 रन बना लिए थे. लंच के बाद जसु पटेल के बॉलिंग बदल गया और उनका जादू चला. एक-एक करके उन्होंने 9 विकेट चटका दिए, दसों विकेट उनके ही खाते में जाते अगर Bapu Nadkarni ने मिडविकेट पर एक कैच लपक लिया होता. जसु पटेल द्वारा पहली पारी में 69 रन देकर 9 विकेट निकालने की वजह भारत मैच में वापस आ गया.

दूसरी पारी में भारत ने अच्छी बैटिंग की और जीत के लिए ऑस्ट्रेलिया को 225 रनों का लक्षय दिया. दूसरी पारी में भी जसु पटेल का जलवा कायम रहा और उन्होंने 5 विकटे चटकाए. भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 119 रनों से हरा दिया था. ये भारत की ऑस्ट्रेलिया पर पहली जीत थी.

भारतीय बॉलर द्वारा एक मैच में 124 रन देकर 14 विकेट लेने का रिकॉर्ड अगले तीस साल तक कायम रहा, उसे नरेंद्र हिरवानी द्वारा टूटा. एक पारी में 9 विकेट लेने का रिकॉर्ड 74 सालों तक कायम रहा, उसे अनिल कुंबले ने तोड़ा.

कानपुर टेस्ट के बाद उन्होंने श्रृंखला में दो और मैच खेले, उसके बाद अगले दो साल तक वो प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खेलते रहे. जसु पटेल और विजय हज़ारे पहले क्रिकेटर थे जिन्हें भारत सरकार ने पदम श्री सम्मान दिया था.