'मैंने कई दिव्यांग लोगों को तनाव और अपने जीवन से निराश होते हुए देखा है. मैं भी कभी उस दौर से गुज़र चुका हूं, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी. मेरे जीवन का लक्ष्य है कि मैं अपने जैसे लोगों को जीवन का कुछ उद्देश्य दे सकूं, जिससे वो पूरी ज़िंदगी आसमान में चमकते सितारे की तरह शाइन करते रहें.'

ये बोल हैं उत्तराखंड की व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कप्तान राजेंद्र सिंह धामी के. कई मैच में भारतीय व्हीलचेयर टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके धामी इन दिनों अपने परिवार का पेट पालने के लिए मज़दूरी करने को मजबूर हैं. लेकिन इन हालात में भी उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है.  

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धामी अभी भी अपने जैसे लोगों की मदद करने का हौसला रखते हैं. मगर कोरोना वायरस महामारी के चलते वो मजबूर हैं. इस महामारी के कारण सारी खेल गतिविधियां बंद हैं. उन्हें भी भारतीय टीम के लिए कई मैच खेलने थे. मगर कोविड-19 महामारी ने सब पर पानी फेर दिया.

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इसलिए मजबूरन धामी को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के गांव में बने अपने घर लौटना पड़ा. इस महामारी से पहले वो अपने जैसे कई बच्चों को क्रिकेट की बारिकियां सिखा रहे थे. वो भी बिना सरकार की मदद के. राज्य सरकार ने उन्हें नौकरी देने का वादा किया था. लेकिन अभी तक बात आगे नहीं बढ़ी है. 

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उनके पिता बुज़ुर्ग हैं और परिवार को सपोर्ट करने के लिए वो इन दिनों एक कंस्ट्रक्शन साइट पर पत्थर तोड़ने को मजबूर हैं. इससे उन्हें हर महीने क़रीब 3000 रुपये की आमदनी होती है. उनकी ये स्टोरी इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. धामी के हालातों को जानने के बाद कुछ लोग उनकी मदद करने के लिए लोगों से अपील कर रहे हैं. आप भी देखिए:

धामी ने बताया कि एक्टर सोनू सूद ने भी कुछ समय पहले 11000 रुपये भेज कर उनकी आर्थिक सहायता की थी. धामी को 2 साल की उम्र में ही पोलियो हो गया था. वो 90 फ़ीसदी दिव्यांग हैं. बचपन में उन्होंने क्रिकेट खेलना हॉबी के रूप में शुरू किया था, लेकिन बाद में ये उनका जुनून बन गया. उन्होंने उत्तराखंड और देश के लिए कई टूर्नामेंट भी जीते हैं. 

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अब ख़बर आई है कि स्थानीय प्रशासन ने धामी के हालातों का संज्ञान लेते हुए उन्हें जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है. पिथौरागढ़ के डीएम डॉ. विजय कुमार जोगदांडे ने ज़िला खेल अधिकारी को उनकी उचित सहायता करने कहा है. 

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