90 के दशक में जवागल श्रीनाथ की गिनती भारतीय टीम के बेस्ट फ़ास्ट बॉलर्स में होती थी. वो 140 KM/Hr की स्पीड से बॉलिंग करते थे. तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें देख लोग कहते थे इंडिया में भी कमाल का फ़ास्ट बॉलर है. मगर श्रीनाथ का करियर उतना आसान नहीं रहा जितना लोग समझते हैं. उन्हें बॉलिंग करने के लिए भी कई बार कप्तान से ख़ुद जाकर कहना पड़ता था. एक इंटरव्यू में अपने स्ट्रग्लिंग डेज़ को याद करते हुए श्रीनाथ ने कई बातें शेयर की हैं.

पूर्व तेज़ गेंदबाज़ जवागल श्रीनाथ ने बताया कि जब उन्होंने भारतीय टीम के लिए खेलना शुरू किया था तब स्पिनर्स का बोलबाला था. कप्तान केवल स्पिन गेंदबाज़ों पर ही विश्वास करते थे. टेस्ट मैच में तो 90 फ़ीसदी बॉलिंग स्पिनर्स ही कराते थे. ये ऐसा दौर था जब टीम किसी मैच में बस एक ही फ़ास्ट बॉलर के साथ मैदान पर उतरती थी.

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जवागल श्रीनाथ ने उन दिनों को याद करते हुए कहा- ‘मैं शिकायत नहीं कर रहा हूं, लेकिन उस समय स्थिति ऐसी ही थी. भारत में ऐसा भी समय था कि हम सिर्फ़ एक तेज़ गेंदबाज़ लेकर खेलते थे वो भी सिर्फ़ नाम के लिए. पिच पूरी तरह से स्पिनर्स के लिए होती थीं.’

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1991 में श्रीनाथ ने भारतीय टीम के लिए अपना पहला वनडे खेला था. उन्होंने आगे कहा- ‘मैं कई बार बहुत अजीब सा महसूस करता था. मैं सोचता था कि आख़िर मैं यहां कर क्या रहा हूं. तब मैं कप्तान के पास जाकर कहता कि मुझे भी बॉलिंग करने दीजिए. कम से कम मुझे इस बात की संतुष्टि तो हो की मैं टीम में हूं.’ 

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श्रीनाथ ने अपने 11 साल के करियर में इंडियन टीम के लिए 229 वनडे में 315 और 67 टेस्ट मैच में 236 विकेट लिए थे. उन्होंने साल 2003 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लिया था. उस दौर में स्पिनर्स पर टीम काफ़ी निर्भर रहती थी, उनका टेस्ट करियर इस वजह से भी अच्छा नहीं रहा. उन्होंने कहा कि अब हालात पहले से अच्छे हैं और अधिक तेज़ गेंदबाज़ों के साथ टीम को खेलता देख उन्हें बहुत ख़ुशी होती है.

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