90 के दशक में ऐसा एक भी विश्व स्तर का कैरम टूर्नामेंट नहीं खेला गया, जिसके टॉप 3 में A. Maria Irudayam का नाम नहीं पहुंचता था. दो बार के विश्व चैंपियन और 9 बार के राष्ट्रीय चैंपियन. साल 2007 तक वो इकलौते कैरम खेलने वाले भारतीये थे जिसे किसी खिलाड़ी को मिलने वाला सबसे बड़ा सम्मान 'अर्जुन अवॉर्ड' मिला हो. इतनी उपलब्धियों के बावजूद मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आपने ये नाम पहली बार पढ़ा और सुना होगा.

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A. Maria Irudayam के बड़े बेटे ने पिता के समक्ष कैरम में करियर बनाने की इच्छा प्रकट की. पिता ने बेटे को कहा कि मैं दो बार वर्ल्ड चैंपियन बना हूं... तुम बाहर जाकर किसी से भी भारतीय वर्ल्ड चैंपियन कैरम प्लेयर का नाम पूछ कर आओ अगर वो मेरा नाम बता देगा तभी मैं तुम्हें ट्रेन करूंगा. कोई A. Maria Irudayam को नहीं जानता था.

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शुरुआत में Irudayam की इच्छा भी कैरम प्लेयर बनने की नहीं थी. बचपन में उन्हें कैरम खेलना पसंद था. शौक़ को पूरा करने वो पास के क्लब में जाने लगे. वहां उन्हें एक पेशेवर खिलाड़ी मिला, Irudayam ने उसे हरा दिया. अगले दिन वो प्लेयर इंडिया रैंकिंग टूर्नामेंट में खेलने गया और जीत गया. Irudayam को लगा वो भी पेशेवर तरीके से कैरम खेल सकते थे.

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भारत के चैन्नई में जन्मे Irudayam ने 1989 और 1997 में International Carrom Federation Cup अपने नाम किया, 1991, 1995 और 2000 में SAARC Carrom Championship जीता इसके अलावा उन्होंने कई बड़े टूर्नामेंट में विजेता होने का गौरव प्राप्त किया. भारत सरकार ने साल 1996 में अर्जुन अवॉर्ड दिया था.

इतने सारे अवॉर्ड फिर भी कोई पहचान नहीं, इसके लिए किसे ज़िम्मेदार ठहराया जाए. कैरम तो घर-घर में खेला जाने वाला खेल है.