आज से क्रिकेट के एक ऐसे सुनहरे दौर का अंत होने जा रहा है, जो किसी ज़माने में हर क्रिकेट प्रेमी की यादों का हिस्सा हुआ करती थी. हम बात कर रहे हैं 'क्रिकेट सम्राट' मैगज़ीन की.

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नब्बे के दशक में जब मोबाइल और इंटरनेट का ज़माना नहीं था तो क्रिकेट की गॉसिप, रिकॉर्ड, मैच विवरण व विश्लेषण को समझने का एकमात्र ज़रिया 'क्रिकेट सम्राट' मैगज़ीन ही हुआ करती थी, लेकिन अब ये मैगज़ीन हमेशा के लिए बंद होने जा रही है. इस मैगज़ीन के बंद होने के साथ ही हमारी क्रिकेट की पुरानी यादें भी इतिहास बनकर बंद हो गई हैं.

मुझे क्रिकेट से उतना ही प्यार है जितना लोगों को PUBG से है

मुझे आज भी वो दौर याद है जब मैं भारतीय टीम की हर सीरीज़ ख़त्म होने के बाद 'क्रिकेट सम्राट' मैगज़ीन के आने का बेसब्री से इंतज़ार किया करता था. इस दौरान मुझे इस बात का बेसब्री इंतज़ार होता था कि इस बार मैगज़ीन के अंदर कौन से खिलाड़ी का पोस्टर होगा, जिसे में अपने कमरे की दीवार पर लगा पाऊंगा. मैगज़ीन ख़रीदते ही सबसे पहले में उसी पोस्टर को देखता था.

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'क्रिकेट सम्राट' के लिए कुछ ऐसी थी मेरी दीवानगी

मुझे आज भी याद है साल 1997 में भारत-पाकिस्तान के बीच टोरंटो (कनाडा) में 'Friendship Cup' सीरीज़ खेली गई थी. भारतीय टीम 6 मैचों की ये सीरीज़ 4-1 से जीती थी. इस दौरान मेरे सबसे पसंदीदा खिलाड़ी सौरव गांगुली ने 6 मैचों में सर्वाधिक 222 रन और सर्वाधिक 15 विकेट चटकाए थे. इस दौरान दादा 'मैन ऑफ़ द सीरीज़' भी बने थे.

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सीरीज़ ख़त्म होने के बाद मैं बेसब्री 'क्रिकेट सम्राट' मैगज़ीन के आने का इंतज़ार कर रहा था. भारतीय टीम को स्वदेश लौटे 10 दिन बीत गए थे, लेकिन मार्किट में मैगज़ीन फिर भी नहीं आई थी. इस दौरान मैंने कई बुक स्टोर पर जाकर पूछा, लेकिन हर कोई यही कहता कि 2-4 दिन में आ जाएगी, लेकिन नहीं आई. मैं परेशान हो गया.

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इस बीच मैंने घर में पड़ी पुरानी मैगज़ीन से उस पब्लिशर्स का पता ढूंढ निकाला, जो हमारे इलाक़े में मैगज़ीन डिस्ट्रीब्यूट करता था. फिर मैंने अपनी स्कूल की कॉपी से एक पन्ना फाड़ा और उस पर एक लंबा सा नोट लिख दिया कि मैं 'क्रिकेट सम्राट' मैगज़ीन का बहुत बड़ा फ़ैन हूं, मुझे अब तक भारत-पाकिस्तान सीरीज़ वाली मैगज़ीन नहीं मिल पाई है. चिट्ठी के साथ में मैंने अपने घर के दो-दो पते भी भेज दिए, ताकि मैगज़ीन आये भी तो किसी न किसी को मिल जाए.

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आख़िरकार पूरे 5 दिन बाद डाक द्वारा मेरे घर पर मैगज़ीन पहुंच ही गई. इस बार सब कुछ मेरी पसंद का था. मैगज़ीन के अंदर मेरे पसंदीदा खिलाड़ी सौरव गांगुली का बड़ा सा पोस्टर था, जिसे मैंने तुरंत ही दीवार पर चिपका डाला था. इस दौरान मुझे पब्लिशर्स के वो शब्द याद आ गए जो उन्होंने मैगज़ीन के साथ में लिखे थे-

'आप जैसे पाठकों की वजह से ही हम अच्छा काम कर पा रहे हैं. उम्मीद करते हैं कि भविष्य में भी आप हमारे साथ इसी तरह जुड़ते रहेंगे और हमारे इस परिवार को यूं ही प्यार करते रहेंगे'. 
न्यवाद  
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आज जब मुझे 'क्रिकेट सम्राट' मैगज़ीन के बंद होने की ख़बर मिली, तो बेहद निराशा हुई. ऐसा लगा जैसे एक सुनहरे दौर का अंत हो गया है.

अंत में इस मैगज़ीन के पब्लिशर्स को बस इतना ही कहना चाहूंगा कि 'क्रिकेट सम्राट' के बंद होने के पीछे ग़लती आपके उन पाठकों की भी है, जिन्होंने समय के साथ इसे पढ़ना छोड़ दिया था. मैं भी उनमें से एक हूं.

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इसे हम ग़लती समझें या पछतावा, लेकिन ये बात सच है कि इंटरनेट ने हमें हमारी कई पुरानी यादों से कोसों दूर कर दिया है.

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया कुछ ऐसी थी-