सुप्रीम कोर्ट ने टीम इंडिया के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ एस. श्रीसंत को बड़ी राहत दी है. बीसीसीआई की तरफ़ से श्रीसंत पर लगाए गए आजीवन प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट ने ख़त्म कर दिया है.

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फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बीसीसीआई श्रीसंत के प्रतिबंध पर एक बार फिर से विचार करे. कोर्ट ने इसके लिए बीसीसीआई को 3 महीने का वक़्त दिया है. साथ ही श्रीसंत का पक्ष सुनने के आदेश भी दिए हैं. अदालत में सभी जजों ने कहा कि एक खिलाड़ी के लिए लाइफ़टाइम बैन ज़्यादा समय है.

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भले ही श्रीसंत पर आजीवन प्रतिबंध ख़त्म हो गया हो, लेकिन देश के लिए क्रिकेट खेलने में उन्हें अब भी वक़्त लगेगा. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद श्रीसंत ने ख़ुशी जताई है.

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ANI से बातचीत में श्रीसंत ने कहा कि 'मैं एक बार फिर से मैदान में उतारने को तैयार हैं. मेरी प्रैक्टिस जारी है. बीसीसीआई 3 महीने में फ़ैसला लेगी. जहां मैंने इतना लंबा इंतजार किया है 3 महीने और सही. नेहरा अगर 38 साल की उम्र में वर्ल्डकप खेल सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं? मैं तो केवल 36 साल का ही हूं. अब मैं मैदान पर ये सोचकर उतरूंगा कि मुझे चोट लगी थी, जिससे उबर कर वापसी कर रहा हूं. मैं लिएंडर पेस को अपना आदर्श मानता हूं, जब वो 45 साल की उम्र में ग्रैंडस्लैम खेल सकते हैं तो मैं क्यों नहीं?

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श्रीसंत पर क्यों लगा था बैन?

साल 2013 में आईपीएल स्पॉट फ़िक्सिंग मामले में श्रीसंत का नाम सामने आया था, लेकिन पुलिस जांच में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी. बावजूद इसके बीसीसीआई ने श्रीसंत पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया.

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इसके बाद श्रीसंत ने बीसीसीआई के इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट व केरल हाइकोर्ट में चुनौती दी. जिसके बाद केरल हाइकोर्ट की एकल बेंच ने उन पर लगा प्रतिबंध हटा दिया था, लेकिन बीसीसीआई की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट को अपना फ़ैसला बदलना पड़ा. जिसके बाद श्रीसंत पर फिर से प्रतिबंध लग गया था.