आखिरी क्रिकेट वर्ल्डकप का फ़ाइनल तो याद ही होगा आपको, पहले मैच टाइ हुआ फिर सुपर ओवर टाइ हुआ फिर सबसे ज़्यादा बाउंड्री लगाने वाली टीम को विजेता घोषित कर दिया गया.

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आखिरी क्रिकेट वर्ल्डकप का फ़ाइनल तो याद ही होगा आपको, पहले मैच टाइ हुआ फिर सुपर ओवर टाइ हुआ फिर सबसे ज़्यादा बाउंड्री लगाने वाली टीम को विजेता घोषित कर दिया गया.

टॉस जीत कर वेस्टइंडीज़ ने भारत को पहले बल्लेबाज़ी का निमंत्रण दिया. भारतीय टीम के कप्तान तब मोहम्मद अज़रुहद्दीन हुआ करते थे. भारतीय बल्लेबाज़ों के बीच कोई बड़ी साझेदारी नहीं बनी और नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे. भारत की ओर से सबसे ज़्यादा रन रवि शास्त्री ने बनाए थे. 110 गेंदो में उनके 31 रनों की बदौलत भारत ने 126 रनों का लक्षय खड़ा किया था.

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युवा सचिन तेंदुलकर भी उस टीम का हिस्सा थे, सचिन मात्र 1 रन बना कर आउट हो गए थे. वेस्टइंडीज़ की ओर से कॉर्टली एंब्रोस की ने सबसे शानदार गेंदबाज़ी की थी, उन्होंने 8.4 ओवर में मात्र 9 रन देकर 2 विकट चटकाए थे.

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उम्मीद की जा रही थी कि वेस्टइंडीज़ इस मैच को आसानी से जीत जाएगी लेकिन पहली गेंद से भारत वेस्टइंडीज़ के ऊपर हावी हो चुका था. कपिल देव और जवागल श्रीनाथ ने केरिबियाई बल्लेबाज़ी की कमर तोड़ दी थी, एक वक़्त ऐसा भी था जब 66 रनों के स्कोर पर वेस्टइंडीज़ की आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी. मैच बचाने की ज़िम्मेदारी पुछल्ले बल्लेबाज़ों के ऊपर थी.

8वीं विकेट के लिए वेस्टइंडीज़ ने अच्छी साझेदारी कर ली और मैच में वापस आ गए. धीर-धीरे कर के वो भारत के 126 रनों के स्कोर के समीप पहुंच गए. अब उनके पास बस एक विकट बचा हुआ था, चार रन बनाने थे. ऐसे मौक़े पर बॉल एक स्पिनर के हाथों में दी गई.

सचिन अपनी गेंदबाज़ी के लिए नहीं जाने जाते थे, लेकिन कप्तान ने उन्हें ज़िम्मेदारी सौंप दी थी. उनके ओवर की आखिरी दो बाल में कमाल हुआ. पांचवी गेंद पर वेस्टइंडीज़ के खिलाड़ी ने बल्ला घुमाया गेंद बाउंड्री की ओर जाने लगी, रफ़्तार कम थी इसलिए पहुंच नहीं पाई लेकिन खिलाड़ी चार रन भाग कर बना चुके थे. और मैच ड्रा हो गया था.

जैसा आपको शुरु से पता है कि हम आपको भारत के पहले ड्रा वनडे मैच के बारे में बता रहे हैं, सो ओवर की आखिरी गेंद पर वही हुआ जो होना था. बल्ले का कोना लेकर गेंद स्लिप में गई और कप्तान अज़हरुद्दीन ने लपक लिया.