बैडमिंटन की दुनिया में सैयद मोदी इंटरनेशनल टूर्नामेंट का नाम बड़े ही अदब से लिया जाता है. लेकिन कभी आपने ये सोचा है जिस शख़्स के नाम पर इस टूर्नामेंट को आयोजित किया जाता है आख़िर वो हैं कौन?

ये एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो प्रकाश पादुकोण और पुलेला गोपीचंद से भी पहले बैडमिंटन के चमकते हुए सितारे हुआ करते थे. इनका पूरा नाम है सैयद मेहदी हसन ज़ैदी. 80 के दशक में वो भारत के टॉप के बैडमिंटन खिलाड़ी हुआ करते थे.

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मगर उनके जीवन की सबसे बड़ी विडंबना और हमारी बदकिस्तमति ये थी कि उनका जीवनकाल बहुत ही छोटा रहा. महज 26 साल की उम्र में ही उनकी हत्या कर दी गई थी. 1988 में जब उनकी हत्या हुई थी तो पूरा देश अपने इस चहेते खिलाड़ी की मौत पर दुखी हो गया था. इस ख़बर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी थीं.

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8 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे सैयद मोदी. उन्हें बचपन से ही बैडमिंटन के खेल में दिलचस्पी थी. 1976 में महज 14 साल की उम्र में सैयद मोदी जूनियर नेशनल बैडमिंटन चैंपियन बन गए थे. ये तो उनकी प्रतिभा की एक छोटी सी झलक थी. 1980 में सैयद ने नेशल बैंडमिंटन चैंपियन का ख़िताब हासिल किया. 

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इसके बाद वो लगातार 8 सालों तक इस ख़िताब को जीतते रहे. नेशनल ख़िताब जीतने के बाद उन्हें रेलवे की तरफ से स्पोर्ट्स कोटा में नौकरी भी मिल गई थी. इसके बाद उन्होंने लखनऊ में इस खेल की जमकर ट्रेनिंग की. 1982 में सैयद मोदी ने कॉमेनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक और उसी साल हुए एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता था. 

उन्होंने अपने करियर में तीन अंतरराष्ट्रीय ख़िताब भी जीते थे. इनमें Austrian International(983 और 1984) और USSR International(1985) जैसे यूरोपियन बैडमिंटन टूर्नामेंट के नाम शामिल हैं. सैयद मोदी ने अपनी जूनियर बैडमिंटन खिलाड़ी अमिता कुलकर्णी से शादी की थी.

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कहते हैं कि उनकी हत्या में अमिता और उनके कथित प्रेमी संजय सिंह का ही हाथ था. मगर लाख इनवेस्टिगेशन करने के बाद भी सीबीआई उन पर लगे इस आरोप को साबित नहीं कर पाई थी. उनकी हत्या के 2 महीने बाद ही 1988 में उनकी बेटी का जन्म हुआ. उनकी हत्या का केस लंबा चला और कुछ दिनों के अंदर ही अमिता और उनके कथित प्रेमी संजय सिंह( जो आगे चलकर उनके पति बने) उन्हें रिहा कर दिया गया.

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सैयद मोदी ऐसे बैडमिंटन प्लेयर थे जिसने इस खेल में भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था. अगर वो ज़िंदा होते तो शायद इंटरनेशनल स्तर पर हम इस खेल और भी ख़िताब अपने नाम कर पाते. 


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