किसी भी देश की करेंसी उसकी पहचान होती है. महात्मा गांधी जी की तस्वीरों वाले नोट भारत की पहचान हैं. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि एक क्रिकेटर की तस्वीरें उसके देश की करेंसी नोट पर छप चुके हैं?

नहीं न! चलिए हम बताते हैं-

इस महान क्रिकेटर का नाम फ़्रैंक वॉरेल था. फ़्रैंक वेस्ट इंडीज़ के पूर्व कप्तान व धाकड़ बल्लेबाज़ों में से एक थे. वो दुनिया के इकलौते क्रिकेटर हैं जिनकी तस्वीर Barbados देश की करेंसी पर छप चुकी है.

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सन 1941 में जब फ़्रैंक ने जब पहली बार फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा तो क्रिकेट प्रेमी उनके खेलने के अंदाज़ के कायल हो गए थे. मैदान पर उतरते ही वो इतनी आक्रमकता के साथ क्रिकेट खेलते थे कि हर कोई उनका फ़ैन बन जाता था.

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हालांकि वो सर डॉन ब्रैडमैन, सुनील गावस्कर, विवियन रिचर्ड्स, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर और ब्रायन लारा की तरह लोकप्रिय नहीं हो पाए, लेकिन वेस्टइंडीज़ के लोग आज भी उन्हें उनकी महानता और मानवता के लिए याद करते हैं.

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वेस्टइंडीज़ क्रिकेट टीम के पहले अश्वेत कप्तान फ़्रैंक वॉरेल ने अपने देश के लिए 51 टेस्ट मैच खेले. वॉरेल की मौत महज 42 साल की उम्र में हो गई, मगर वो अपने पीछे एक ऐसी लीगेसी छोड़ गए जिसने वेस्टइंडीज़ टीम को बहुत आगे जाने का रास्ता दे दिया.

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सन 1960 से पहले तक वेस्टइंडीज़ में अंग्रेज़ों की ही चलती थी. अश्वेत लोगों को इस काबिल नहीं समझा जाता था. इस दौरान वेस्टइंडीज़ के कई अख़बारों ने फ़्रैंक वॉरेल को ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए टीम का कप्तान बनाए जाने के लिए कैंपेन चलाए. आख़िरकार सन 1960-61 में वॉरेल को वेस्टइंडीज़ का कप्तान बनाया गया. इसके बाद इस महान क्रिकेटर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. विरोधी टीमों से लेकर अपने देश के खिलाड़ियों ने उनकी कप्तानी में दुनियाभर में अपने खेल से ख़ूब शोहरत बटोरी की.

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वॉरेल ने जब बचाई थी भारतीय कप्तान की जान

फ़्रैंक वॉरेल को लेकर एक किस्सा इंडिया से भी जुड़ा हुआ है. जब 1962 में टीम इंडिया वेस्टइंडीज के दौरे पर थी तो भारतीय कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर बैटिंग करते हुए चार्ली ग्रिफ़िथ की बाउंसर पर गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसके बाद उन्हें ऑपरेशन के लिए तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया. इस दौरान फ़्रैंक ने भारतीय कप्तान को ब्लड डोनेट कर उनकी जान बचाई थी.

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फ़्रैंक वॉरेल के इस महान कार्य के बाद आज भी कोलकाता के 'ईडन गार्डन्स' मैदान पर उस दिन को 'फ़्रैंक वॉरेल डे' के रूप में मनाया जाता है. इस ख़ास मौके पर यहां कई सारे ब्लड डोनेशन कैंप लगाए जाते हैं.

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क्रिकेट से संन्यास के बाद फ़्रैंक वॉरेल दो साल तक जमैका के सीनेटर भी रहे. अनेकों द्वीपों को एकजुट कर वेस्टइंडीज़ की क्रिकेट टीम बनाने में वॉरेल का अहम रोल रहा है. इसी प्रयास के कारण उन्हें वेस्टइंडीज क्रिकेट को एकजुट करने वाले क्रिकेटर के रूप में भी जाना जाता है.

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इस कप्तान के इसी रोल को देखते हुए बारबेडोस ने अपने 5 डॉलर के करेंसी नोट और डाक टिकट पर सर फ़्रैंक वॉरेल की तस्वीर छापी. अब इनके नाम से ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ के बीच ट्रॉफ़ी भी खेली जाती है.