टोक्यो ओलंपिक(Tokyo Olympics) में दुनियाभर से आई 205 टीम्स हिस्सा ले रही हैं. मगर यहां ग़ौर करने वाली बात ये है कि वर्ल्ड में 193 देश हैं, फिर ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली टीम्स 205 कैसे हुई? नहीं पता, आइए आपको समझाते हैं ये कैसे हुआ.

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इस सवाल का जवाब पाने के लिए आपको ओलंपिक के इतिहास और नियमों को जानना होगा. दरअसल, ओलंपिक गेम्स में अपनी टीम में भेजने के लिए किसी भी देश या क्षेत्र के पास National Olympic Committee होनी चाहिए. साथ ही इसका International Olympics Committee (IOC) द्वारा मान्यता प्राप्त होना भी अनिवार्य है. फ़िलहाल पूरी दुनिया में ऐसी 206 समितियां हैं.

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इनमें से 205 के खिलाड़ी इन गेम्स में खेल रहे हैं सिवाय उत्तर कोरिया को छोड़कर जिसने कोरोना महामारी के चलते अपनी टीम को यहां नहीं भेजा है, लेकिन अभी भी 12 टीम ऐसी हैं जो रहस्यमयी हैं. ठहरिये, ये रहस्यमयी नहीं हैं इन्हें बस संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त नहीं है. ओलंपिक के नियमों के अनुसार, इसमें हिस्सा लेने वाली टीम का स्वतंत्र राज्य होने की अनिवार्यता नहीं है. क्योंकि ओलंपिक के संस्थापक Pierre de Coubertin का मानना था कि एथलेटिक भूगोल राजनीतिक भूगोल से कई बार भिन्न हो सकता है.

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20वीं सदी के अंत तक यही नियम चलता रहा, लेकिन 1996 से IOC ने नियमों में बदलाव कर इसे हटा दिया. अब उन्होंने किसी स्वतंत्र देश की National Olympic Committee का अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा मान्यता प्राप्त होना अनिवार्य कर दिया है. हालांकि, इसमें भी कुछ नियम व शर्तें लागू हैं. अब जो 13 देश बच गए हैं उन्हें संयुक्त राष्ट्र ने मान्यता तो नहीं दी है, लेकिन वो स्वतंत्र राष्ट्र हैं. इनमें से इन 4 देशों का भू-राजनीतिक विवाद चल रहा है: फ़िलिस्तीन, हांगकांग, कोसोवो, और  ताइवान.

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बाकी के देश मुख्यत: द्वीप समूह हैं जिन्होंने पहले 1996 से पहले ही ओलंपिक में खेलने की IOC से मान्यता प्राप्त कर ली थी. ये हैं: अमेरिकन समोआ, अरूबा, बरमूडा, केमैन आइलैंड्स, कुक आइलैंड्स, गुआम, प्यूर्टो रिको, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, और यूएस वर्जिन आइलैंड्स.

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