भारत एक ऐसा देश है जहां पर गंगा जमुनी तहजीब आज भी जिंदा है और हमेशा जिंदा रहेगी अगर हमारे देश में आरिफ़ भाई जैसे लोग जन्म लेते रहेंगे.

जी हां, आरिफ़ भाई एक ऐसे शख़्स हैं, जो धर्म के नाम पर लड़ने वाले समाज के ठेकेदारों से बिलकुल अलग हैं. उनके लिए धर्म की इज़्ज़त करना सबसे बड़ा धर्म है. इससे पहले की हम आगे बढ़ें आपको बता दें कि आरिफ़ भाई के बारे में हिमांशु कुमार ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर किया है.

Source: thelogicalindian

आइये अब आपको बताते है आरिफ़ भाई के बारे में:

आरिफ़ भाई बड़ोदा के एक बाज़ार में तालों की दुकान लगाते हैं. कुछ समय पहले की बात है मैं ताला खरीदने के लिए बड़ौदा के बाजार में गया था, मेरे साथ मेरे बहनोई भी थे.

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मेरे बहनोई ने कहा माता जी के घर के लिए भी एक ताला ले लेते हैं, दुकानदार एक मुस्लिम व्यक्ति थे और उनका नाम था आरिफ़, 'उन्होंने कहा माताजी के लिए आप जितने भी ताले लेंगे उसका कोई पैसा नहीं लूंगा.

जब हमने उनसे पूछा क्या मतलब?

तो उन्होंने बताया मंदिर या मस्जिद के लिए आप को जितने भी ताले लेने हैं, मैं उनका कोई पैसा नहीं लूंगा. अगर कोई भी मंदिर या मस्जिद के लिए मुझसे टला खरीदता है तो मैं किसी से कोई पैसा नहीं लेता.

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आरिफ़ भाई बताते हैं कि आज सुबह ही एक मंदिर वाले बारह ताले ले कर गए, मैंने उनसे कोई पैसा नहीं लिया. आपको बता दें कि आरिफ़ भाई की बराबर वाली दुकान एक हिंदू की थी, जिसकी दुकान का नाम महालक्ष्मी बेल्ट है. बगल वाली दुकानदार बोले यह सच है आरिफ़ भाई मंदिर और मस्जिदों के लिए ताले के पैसे नहीं लेते हैं.

मैंने आरिफ़ भाई को बताया यह मेरे बहनोई है और ये जिन्हें माता जी कह रहे हैं वो दरअसल, मेरी मां हैं, यानी इनकी सास जो इनके साथ ही सामने वाले घर में रहती हैं. यह अपनी सास के लिए ताला खरीदना चाहते हैं इसलिए उन्हें माता जी कह रहे हैं.

आरिफ़ भाई कहते हैं, 'ऊपरवाला एक ही है, हम सब उसके बंदे भी एक हैं, यह मज़हब के नाम पर लड़ाई कराने वालों ने बहुत तकलीफ़ पैदा की हुई है, लेकिन हम सबको चाहिए मिलजुल कर रहें.'

मैंने आरिफ़ भाई से पूछा मैं आपका फ़ोटो खींच कर फेसबुक पर आपके बारे में लिख सकता हूं क्या? आरिफ़ भाई ने शरमाते हुए कहा कि मैं तो एक छोटा सा इन्सान हूं मेरी फ़ोटो का क्या कीजिएगा.

आरिफ़ भाई उन चंद लोगों में से हैं, जो आज भी हिन्दुस्तान में धार्मिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए एक मिसाल हैं. और ये बात सही भी है अगर हम एक ही देश में रहकर धर्म के नाम पर ही लड़ते रहेंगे तो अपना और अपने देश का भविष्य सुनहरा कैसे बनायेंगे.

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