'गहरा समुद्र डरावना था, ये वो नज़ारा था, जिसे मैंने अपनी ज़िंदगी में आजतक नहीं देखा था.' ये शब्द हैं चैंपियन सेलर अभिलाष टॉमी के, जो उन्होंने Ile Amsterdam से सैटेलाइट फ़ोन पर बात करते हुए कहे. ये जगह हिंद महासागर की किसी वीरान जगह पर मौजूद है. सोमवार को अभिलाष को हिंद महासागर के दक्षिण हिस्से से बचा कर निकाला गया.

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कौन है अभिलाष टॉमी?

5 फरवरी, 1979 को पैदा हुए कमांडर अभिलाष टॉमी भारत के पहले और एशिया के दूसरे व्यक्ति हैं जिन्होंने नाव से अकेले बिना किसी सहायता के पृथ्वी का चक्कर लगाया है. सेना की ओर से किर्ती चक्र भी मिल चुका है.

फ़िलहाल 39 वर्षीय नाविक बैक इंजरी का इलाज करवा रहे हैं. इनकी ये हालत पिछले सप्ताह एक समुद्री तूफ़ान में फंस जाने की वजह से हुई. जिसमें उनकी यॉट भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. उन्होंने इस साल Golden Globe Race में हिस्सा लिया था. जिसमें अकेले हिस्सा लेना होता है और प्रतिभागी नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं कर सकता. ये एक शर्त इस रेस को और भी मुश्किल बनाती है.

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अपनी ज़िंदगी के सबसे खतरनाक 70 घंटों को याद करते हुए टॉमी ने कहा कि वो 21 सितंबर को अपने नाव (Thuriya) के डेक पर काम कर रहे थे, तभी एक तेज़ हवा का झोंका उनकी नाव से टकराया, जिससे उनकी यॉट 110 डिग्री तक झुक गई और नाव का Mast पानी में चला गया.

'ये बहुत डरावना था, जब ऐसा पहली बार हुआ तब मेरे पैर फ़िसल गए. मैं Mast पर गिर गया. (Mast नाव का वो हिस्सा होता है, जिसे सीधे खड़ा रखा जाता है.)

नाव सीधी हुई, तब मैं भी उसके साथ लटकता हुआ Mast के साथ ऊपर चला गया.' रिपोर्टर को ये बताते वक्त अभिलाष की हिचकियां नहीं रुक रहीं थी.

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पहला झटका तो बस एक शुरुआत थी. इसके बाद अभिलाष टॉमी के असली संघर्ष और शक्ति परिक्षण की कहानी शुरू होती है.

जब टॉमी हवा में लटक रहे थे तब उनका हाथ रस्सियों में फंस गया था. 'मेरी घड़ी रस्सियों में उलझ गई थी, मैं एक हाथ से हवा में लटक रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी कलाई टूट उखड़ जाएगी. घड़ी की पट्टी टूटी और मैं नीचे गिरा.'

ये पहला झटका था, आगे ऐसे तीन और झटके मिलने वाले थे. जिनमें से आखिरी सबसे भयानक था.

टॉमी ने कहा, 'मुझे चेतावनी मिली थी कि 100 Kmph रफ़्तार की आंधी और 10 मीटर ऊंची लहरें आगे से आ रही हैं लेकिन सामने से जो दानव आया, वो कुछ और ही था. 150 Kmph तेज़ी की आंधी और 14 मीटर ऊंची लहरें. समुद्र में एक इंच भी ऐसा नहीं दिख रहा था जो सफ़ेद हो. हर जगह सिर्फ़ झाग था. जैसे-जैसे वक्त बीतता जा रहा था, मंज़र और भयानक होता जा रहा था.'

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'मैंने अपने नाव के सभी पर्दे उतार दिए थे. हर वो तरकीब आज़मा ली थी जिसे मैंने किताब में पढ़ा था. आंधी इतनी ज़ोरदार थी कि मैं नाव की स्टीयरिंग तक को नहीं पकड़ पा रहा था. नाव किसी भी दिशा में आगे नहीं बढ़ रही थी. ये कुछ ऐसा हो रहा था जिसे मैंने आज तक नहीं देखा था.' .

दूसरे झटके के बाद अभिलाष की नाव बुरी तरह तहस-नहस हो चुकी थी. बोट में गैस लीक हो रहा था, इंजन के पास डीज़ल भी लीक हो रहा था. जब वो सब कुछ ठीक करने में व्यस्त थे तब वो हुआ जिसने परिस्थिती के पूरी तरह बिगाड़ कर रख दी. अभिलाष हिल नहीं पा रहे थे. उनके बैक में इंजरी आ चुकी थी.

'मैंने अपनी पूरी ताकत जुटा कर चलने की कोशिस की. लेकिन मैं बार-बार गिर जा रहा था. तभी मेरे मन में ख़्याल आया कि मैं कुछ देर लेटे रहूं और आराम कर लूं. तभी मेरी नाव 360 डिग्री घूम गई और मुझे कुछ टूटने की आवाज़ आई.'

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उन्हें पता चल चुका था कि अब हालात काबू में नहीं आ सकते थे, वो रेंगते हुए बंक के पास गए और उन्होंने मदद के लिए संपर्क स्थापित किया. दूसरी ओर से भी निर्देश मिले, जिससे उनको अभिलाष को ढूंढने में आसानी हो सके.

'उन 70 घंटों में मेरे दिमाग़ में कुछ नहीं चल रहा था. इतने सालों में मैंने ख़ुद को यही सिखाया था. सोचने से समस्या होती है. मैं बस देख रहा था कि आगे क्या करना है.'

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24 सितंबर को ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस की टीम टॉमी को ढूंढने में सफ़ल रही, अभिलाष टॉमी ने बताया, 'जब वो मेरे नाव पर आए, तो मुझे पहली आवाज़ सुनाई दी, 'क्या हमारे पास आपके नाव पर आने की अनुमति है?' जिसका मैंने सकारात्मक जवाब दिया.'

इस घटना से पहले टॉमी ग्यारह प्रतिभागियों में तीसरे स्थान पर चल रहे थे. 1 जुलाई को शुरू हुई इस प्रतियोगिता में वो 10,500 Nautical Miles का सफ़र तय कर चुके थे. अभिलाष को सबसे ज़्यादा रेस से बाहर होने का दुख था.