आओ सुनाऊं सांप की एक कहानी.

एक सांप था ज़हरीला सा, फूफकारते हुए चलता था. सबके सामने, शांति से कुंडली मारे बैठा रहता था.

कुछ ढूंढ रहा था शायद वो, जाने किसका इंतज़ार था. जब भी मिलता यही कहता,

'मैं दूध नहीं पिऊंगा, मैं दूध नहीं पिऊंगा'

सांप बोलता नहीं है, यही कहोगे न? पर ये सांप थोड़ा अलग था. आंखों-आंखों में इशारा कर देता था. Horlicks, Rooh-Afzah और यहां तक कि Cerelac डालकर भी उसे दूध पिलाने की कोशिश की गई. लेकिन सारे दूध पर वो पानी फेर देता था. न जाने बेचारे को दूध से इतना बैर क्यों था? जब कि सब लोग उसे गाय का दूध ही पिलाते थे.

सुंदर कन्या सांप के अंदर के सोए हुए शेर को जगाती है

एक दिन एक सुंदर कन्या, फुलेश्वरी उसे दूध पिलाने के लिए आई. सांप ने सिर उठाया और फुलेश्वरी पर झपट पड़ा. शांत, दूध न पीने वाले सांप ने नारी के गले में पड़ा हीरा देख लिया और फुलेश्वरी को डसने के लिए फ़र्राटेदार स्पीड से रेंगने लगा. फुलेश्वरी जीप में बैठकर घर आ गई और आराम करने लगी, लेकिन सांप अति तेज़ था. घर के बाहर ही फुलेश्वरी का इंतज़ार करने लगा.

सांप की Intelligence किसी Supercomputer से 100 गुना ज़्यादा थी. वो शांत था, फ़ुर्ती के लिए चाहिए थी सिर्फ़ एक सुंदर फुलेश्वरी, जिसने सांप के अंदर सोये हुए शेर को जगा दिया.

सांप हवस की आग में नहीं जल रहा था, कहानी कुछ और ही थी.

सांप इंतज़ार करता रहा, कुछ देर बाद फुलेश्वरी भागती हुई बाहर निकली (नशे में चल रही थी शायद, क्योंकि सांप नहीं दिखा). फुलेश्वरी चलते-चलते जंगल में पहुंच गई, जहां एक बंदा, कुमार पहले से बीन बजा रहा था. सांप भी फुलेश्वरी का पीछा करते-करते जंगल में पहुंचता है. सांप दिल का बहुत अच्छा है, फुलेश्वरी को बीन की धुन Enjoy करने के लिए कुछ मिनट भी देता है और फिर डस लेता है. कुमार, फुलेश्वरी के शरीर से ज़हर चूस लेता है (काफ़ी Romantic). ज़हर के Exchange के दौरान ही दोनों को प्यार हो जाता है, दोनों इज़हार कर लेते हैं.

बेचारे सांप को बेरहमी से Ignore कर दिया जाता है.

फुलेश्वरी और कुमार का जबरदस्त इश्क़

फुलेश्वरी को पहली मुलाकात में ही 7 जन्मों वाला इश्क़ हो जाता है और वो अगले दिन भी अपने पिया से मिलने जाती है. उसे लड़केवाले देखने आते हैं, लेकिन फुलेश्वरी सारे बंधन तोड़कर, अपने बलमा से मिलने चली जाती है. सांप जंगल में इधर-उधर अपनी लव स्टोरी की तलाश कर रहा था, पर बेचारे को कोई मादा सांप नहीं मिली (I Guess).

फुलेश्वरी का रोमैंस सांतवें आसमान पर था, तभी उसके बाबूजी, छेदीलाल अपने गुंडों को लेकर पहुंच जाते हैं. फुलेश्वरी और उसके प्रेमी को अलग कर दिया जाता है. बाबूजी के गुंडे बंदे को खूब मारते हैं.

मादा सांप ढूंढते-ढूंढते नर सांप उसी जगह पहुंचता है और एक गुंडे को डस लेता है, सभी गुंडे भाग जाते हैं और बीन बजाने वाला बच जाता है.

फुलेश्वरी को घर पर बाबूजी बहुत सुनाते हैं. विद्रोही कन्या, बाबूजी से बहसबाज़ी करती है, अपने प्यार की भीख मांगती है.

इधर बीन बजाने वाला पिटने के बाद मौन हो जाता है. उसकी मां उसे Emotional Blackmail करती है, पर वो अपने रोमेंस का एक भी किस्सा नहीं सुनाता.

बीन बजाने वाला (शायद आदतन) फिर से बीन बजाता है. कन्या कमरे में बंद रहती है. दूध न पीने वाला सांप कन्या के कमरे तक पहुंचता है और बड़ी चतुराई से अपने बदन को कुंडी पर घुमा-घुमाकर उसे खोलता है. फुलेश्वरी भागकर अपने प्रेमी तक पहुंचती है. अपना सांप सुपरहीरो है भाई. डसने वाला सांप, कुंडी खोलने वाला सांप बन जाता है और प्रेमी-प्रेमिका को दोबारा रोमैंस करने का मौका देता है (Single होते हुए भी).

सांप का कुमार से रिश्ता

बीन बजाने वाला रोमैंस को Pause कर भारी मन से घर पहुंचता है और उसकी मां उसे कहती है,

तेरा बाप तुझसे तेरे खून का कर्ज़ मांगता है और तेरी मां तुझसे अपने दूध का कर्ज़ मांगती है...खून और दूध कर्ज़ अदा कर बेटा.

अपना कुंडी खोलने वाला सांप बातें सुनने वाला सांप बन जाता है और मां-बेटे की सारी बातें सुन लेता है. सांप को अपने पुराने दिन याद आते हैं और वो अपनी 'मां' को पहचान जाता है.

सांप को Horlicks वाला दूध या फिर Rooh Afzah वाला दूध इसलिये नहीं पसंद था क्योंकि उसने 'मां का दूध' पी लिया था.

फुलेश्वरी अपने बाबूजी को मनाती है और कुमार को अपने घर बुलाती है (पार्टी के लिए कुछ और न समझें, ये अच्छी कहानी है). छेदीलाल और कुमार का Formal Intro होता है. कुछ देर बाद कुमार की मां भी वहां पहुंचती है और होने वाले समधियों में बहसबाज़ी होती है.

कुमार की मां का इल्ज़ाम है कि फुलेश्वरी के बाबूजी ने उसका सुहाग उजाड़ दिया था.

फुलेश्वरी को अपने बाबूजी की बेइज़्ज़ती बर्दाशत नहीं होती और वो अपने प्रेमी को मां समेत घर से निकाल देती है.

फुलेश्वरी, सच और सांप

कुछ देर बाद फुलेश्वरी अपने पिता को कुछ गहनों के साथ देख लेती है और उसे अपने बाबूजी पर बहुत गुस्सा आता है. छेदीलाल के सह-गुंडे फुलेश्वरी और उसे कमरे में बंद कर देते हैं. हीरो और सांप ये सब ग़ौर से खिड़की से देख रहे होते हैं.

सह-गुंडे हीरे लेकर भागने की कोशिश करते हैं लेकिन छेदीलाल उनका रास्ता रोकता है. सह-गुंडे उसे कुचल देते हैं. छेदीलाल माफ़ी मांगने कुमार के मां के पास जाता है (गाड़ी से कुचले जाने के बावजूद) लेकिन कुमार की मां ने उसका रास्ता मंदिर की तरफ़ Divert कर दिया. मंदिर में पहले से ही अपना हीरो सांप मौजूद रहता है. कुंडी खोलने वाला सांप, मुक्ति देने वाले सांप में बदल जाता है और छेदीलाल को डस कर मुक्ति दे देता है.

सह-गुंडे शराब और शबाब के साथ विदेशी को हीरे बेचने में व्यस्त हो जाते हैं. हीरो सांप विदेशी का भी काम तमाम कर देता है (विदेशी को सज़ा मिलने का कारण, पता नहीं). सहगुंडों को Realize होता है कि ये सांप उनकी भी जान ले सकता है.

फुलेश्वरी, उदास कन्या बनकर बैठी रहती है और एक गुंडे का बेटा वहां पहुंच जाता है. इससे पहले कि वो फुलेश्वरी की इज़्ज़त पर हाथ डाल पाता, कुमार वहां पहुंच जाता है और गुंडे को जम कर पीटता है. लेकिन हीरो है सांप और जम कर हुई लड़ाई-झगड़े के बाद वो गुंडे को डस लेता है.

सांप के डसने के बाद गुंडे को उसके भाई-बंधु तांत्रिक के पास ले जाते हैं, डॉक्टर के पास नहीं(डॉक्टर हीरो नहीं, सांप हीरो है). तांत्रिक ने रामबाण इलाज बताया, 'वही सांप इसका ज़हर चूस सकता है.'

सह-गुंडों का अंत और Finally सांप का दूध पीना

तांत्रिक बीन बजाकर सांप को बुलाता है. हीरो सांप के ज़हर का असर किसी करिश्मे से कम नहीं, गुंडे की सांसें चलती रहती हैं. सांप पहुंच जाता है. पहली बार बिना मर्ज़ी के कहीं पहुंचता है. सांप ज़हर चूसने जाता ही है कि इधर कुमार भी बीन बजाने लगता है (मम्मी Motivate करती है). सांप Confuse हो जाता है लेकिन सांप ज़हर नहीं चूसता और तांत्रिक के अड्डे से निकल जाता है. Mental Pressure Imagine करो. गुंडा सांप के जाते ही मर जाता है और नाग अपने परिवार (कुमार के परिवार) से जा मिलता है.

एक दूसरा गुंडा कुमार और उसके परिवार को जलाने की कोशिश करता है, लेकिन सभी बच जाते हैं.

गुंडा भागता है और जान बचाने के लिए मंदिर में छिप जाता है. शिवलिंग के पास हीरो सांप पहले से ही बैठा रहता है. किसी RAW एजेंट से भी ज़्यादा Intelligent है ये सांप. सांप फूफकार-फूफकार के गुंडे को मंदिर से डराकर भगा देता है. कुमार गुंडे की पिटाई करता है लेकिन हीरो है सांप. फ़ाइनल वार वही करता है और गुंडा मर जाता है. सांप Is Super Awesome!

आखरी बचा गुंडा एक दूसरे विदेशी को हीरे बेचने की कोशिश करता है. अंग्रेज़ शर्त रखता है, सांप की लाश लाकर दो. जान बचाने वाला तांत्रिक गैंगस्टर बन जाता है. सांप को बुलाने का ज़िम्मा तांत्रिक लेता है और पैसों का आधा हिस्सा मांगता है. तांत्रिक एक कदम आगे निकलता है, कुमार की मां को पहले से ही किडनैप करके ले आता है. कुमार भी मां को बचाने आता है, दरवाज़े से नहीं छत से कूदकर. लेकिन हीरो सांप है.

कुमार को बीन बजाकर सांप को बुलाने के लिए मजबूर किया जाता है. आखिरी गुंडा, उसकी मां को चाबुक से मारता है, हारकर कुमार को बीन बजानी पड़ती है. कुमार बीन बजाते हुए गाता है-

तांत्रिक के चमचे कई नेवले लेकर आते हैं. साइड बाई साइड कई सांप जमा होते हैं. कुमार गाना ख़त्म होने से पहले बीन तोड़ देता है. सैंकड़ों सांप मौके पर पहुंचते हैं और एक-एक गुंडे को ख़त्म करते हैं. तांत्रिक को सांप काटता है, लेकिन तांत्रिक को कुछ नहीं होता. कुमार उसी के त्रिशूल से उसका काम-तमाम कर देता है.

कुमार, आखरी गुंडे को एक जगह लटकाकर खूब मारता है, हंटर टूट जाती है. हीरो तो सांप है, वो कूदकर भैंरो सिंह को डसता है.

सबसे फैजल की तरह बदला लेने के बाद, हीरो सांप लगभग 25 साल बाद दोबारा दूध पीने लगता है और बरसों बाद उसका व्रत टूटता है.

ये कहानी है फ़िल्म 'दूध के कर्ज़' की. फ़िल्म को इस तरह से पेश करना आपको कैसा लगा ये कमेंट में बताइये, हम इस तरह के लेख फिर से ले आयेंगे.