राज कुमार राव की अगली फ़िल्म 'स्त्री' का ट्रेलर आ चुका है. इस फ़िल्म की कहानी हॉरर और कॉमेडी का मिश्रण है. ट्रेलर में ये भी दावा किया गया है कि इसकी कहानी सच्ची घटनाओं पर आधारित है. तो हमने भी उस कहानी की पड़ताल की, जिस पर 'स्त्री' की कहानी केंद्रित है.

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ये तब की बात है, जब बेंगलुरु भारत का आईटी हब नहीं हुआ करता था. 90 के दशक की कहानी है. लगभग हर घर के ऊपर लिखा होता था, 'ओ स्त्री, कल आना'.

जैसा कि फ़िल्म के ट्रेलर में दिखाया गया है, कपड़ों से लदी एक 'स्त्री' हवा में झूल रही होती है, उसके पैर नहीं दिखते. 90 के दशक में बेंगलुरु के रहने वाले भी स्त्री का हुलिया कुछ ऐसा ही बताते हैं.

किवंदिती के अनुसार, वो रात में दरवाज़ा खटखटा कर आपके चहते इंसान के आवाज़ में नाम पुकारती थी. जिसने भी दरवाज़ा खोला, अगले 24 घंटे में उसकी मौत हो जाती थी.

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पूरे शहर में ये कहानी फ़ैल चुकी थी, सब दहशत के माहौल में जी रहे थे. तभी कहीं से इसका एक उपाय लोगों ने निकाला, 'Nale Ba', इसका मतलब 'कल आना'. सबने अपने दरवाज़े पर इसे लिखवा लिया. इससे उन्हें ये हिम्मत मिल गई कि अगर चुड़ैल हमारे घर आएगी, तो 'कल आना' पढ़ कर वापस चली जाएगी.

इस कहानी की ख़्याति का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि आज भी बेंगलुरु के कुछ हिस्सों में 1 अप्रेल को Nale Ba Day मनाया जाता है.

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