हाल ही में लखनऊ के ब्राइटलैंड स्कूल में एक लड़की ने पहली क्लास के एक छात्र को चाकू से वार कर दिया. इसके पीछे लड़की का मकसद स्कूल में छुट्टी करवाना था. इस घटना ने न सिर्फ़ सारे देश को स्तब्ध कर दिया, बल्कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया. इस मामले में स्कूल प्रिंसिपल को जेल भेज दिया गया है, जबकि लड़की को 24 घंटे जुवेनाइल होम में बिताने के बाद अंतरिम ज़मानत पर रिहा किया गया है.

इस तरह की घटना को रोकने के लिए लखनऊ के स्कूल प्रशासनों ने अपने यहां बच्चों के बैग की तलाशी ली, जिसमें कई बच्चों के बैग से सिगरेट, लाइटर, ब्लेड, मोबाइल फ़ोन, और पॉर्न मैगज़ीन जैसी चीज़ें मिली हैं.

इस तरह की कोई घटना उनके यहां न घटे इसके लिए प्रदेश के कई बड़े स्कूल प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है. इस बाबत प्रशासन की तरफ़ से एक लिस्ट बनाई गई है, जिनमें रेजर, शेविंग फोम, सिगरेट, लाइटर, ब्लेड, मोबाइल फ़ोन, पॉर्न मैगज़ीन और गुटखा जैसी चीज़ों को लाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसके साथ ही टीचर्स द्वारा बच्चों के बैग की तलाशी भी ली जा रही है, जिससे इस तरह की घटना को रोका जा सकें.

ऑल-बॉयज़ एजुकेशनल इंस्टीटूशन के एक टीचर का कहना है कि 'इसी तलाशी के दौरान हमें 9वीं क्लास के एक लड़के के बैग से पॉर्नोग्राफ़ी मैगज़ीन मिली, जिसे छिपाने के लिए उनसे उस पर कवर चढ़ा कर साइंस सब्जेक्ट की नेम चिट चिपकाई हुई थी. इसके अलावा हमें कुछ लड़कों के बैग से सिगरेट के पैकेट और लाइटर भी मिले हैं. हमने इसकी शिकायत लड़कों के घरवालों के भेज दी है.'

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तलाशी का ये अभियान लड़की के स्कूल्ज़ में भी दिखाई दिया, जहां हर 15 मिनट बाद अलग-अलग क्लास में बच्चियों के बैग चेक किये गए. लड़कियों के बैग से कैंची, ब्लेड, नेल पोलिश और लिपस्टिक जैसी चीज़ें मिली हैं.

इसी के साथ ही प्रशासन की तरफ़ से घरवालों को भी कहा गया है कि वो नियमित रूप से अपने बच्चों के बैग चेक करें, क्योंकि हर दिन 2500 बच्चों के बैग चेक करना कोई आसान काम नहीं है.

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