एक समय सुहैब इलियासी मीडिया जगत में जाना-पहचाना चेहरा था, जिसने हिंदुस्तान में अपराध जगत से जुड़ी घटनाओं पर पहली बार कोई प्रोग्राम बनाया. करीब दो दशक पहले सुहैब इलियासी ने 'इंडियाज़ मोस्ट वॉन्टेड' के नाम से एक क्राइम शो बनाया. ये शो इतना मशहूर हुआ कि घर-घर में सुहैब इलियासी की चर्चा होने लगी. आज भले ही कोर्ट ने इलियासी को सलाखों के पीछे भेज दिया हो, पर एक समय ऐसा था, जब इलियासी हर दिन बुलंदियों की नई ऊचाइंया छू रहे थे.

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अपराध से जुड़ी कहानियों को पर्दे पर दिखाने से पहले इलियासी ख़ुद उसकी तह तक जाता था और उससे जुड़े हर पहलू की जांच करता था. आज भले ही क्राइम पेट्रोल और सावधान इंडिया जैसे शो इसी काम को कर रहे हों, पर Investigative Journalism के साथ इस तरह का प्रयोग करके इलियासी ने ही इस तरह के शो की ज़मीन तैयार की. इलियासी की पत्रकारिता का ये असर था कि अपराधी भी उससे ख़ौफ़ खाते थे.

अपराध जगत की कहानियों को पर्दे पर दिखाने वाले इलियासी की निजी ज़िंदगी भी किसी फ़िल्म की कहानी से कम नहीं है. दिल्ली में पैदा हुए इलियासी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर से पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही इलियासी की मुलाकात अंजू से हुई. इलियासी और अंजू की मुलाकातों का सिलसिला बहुत जल्द ही प्यार में बदल गया, पर उनके प्यार के आड़े धर्म एक बड़ी दीवार बन कर खड़ा हो गया, जिसके लिए न ही इलियासी के घर वाले माने और न ही अंजू के. इस दीवार को तोड़ते हुए आख़िरकार दोनों ने लंदन में शादी की. शादी के बाद अंजू और इलियासी की ज़िंदगी वैसी नहीं रही, जिसके सपने दोनों ने साथ मिल कर देखे थे.

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शादी के एक साल बाद ही दोनों के बीच मन-मुटाव होना लगा. ये नौबत यहां तक आ गई कि अंजू ने तलाक का फ़ैसला ले लिया, पर इलियासी द्वारा समझाने पर वो किसी तरह मान गईं और साथ रहने लगी. इसी दौरान 1998 में इलियासी ने इंडिया का पहला क्राइम शो 'इंडियाज़ मोस्ट वॉन्टेड' बनाया. ये शो अभी कामयाबी की नई कहानियां लिख ही रहा था कि पति-पत्नी में फिर अनबन शुरू हो गई और अंजू इलियासी को छोड़ कर अपनी बहन के पास कनाडा चली गईं. एक बार फिर इलियासी के मनाने पर अंजू देश लौट आईं. यहां लौट कर इलियासी ने एक सॉफ़्टवेयर कंपनी खोली, जिसका नाम उन्होंने अपनी बेटी आलिया के नाम पर रखा. अंजू को इस कंपनी के 25% शेयर दिए गए.

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10 जनवरी 2000 को दिल्ली के मयूर विहार स्थित फ्लैट में अंजू की रहस्यमयी हालत में मौत हो गई, जिसके बारे में इलियासी ने आत्महत्या की कहानी गढ़ी. पुलिस ने भी इलियासी की बातों से सहमत हो कर इस केस को बंद कर दिया. हालांकि अंजू के परिवार वाले कभी इस बात से सहमत नहीं हुए. कनाडा से लौटी अंजू की बहन रश्मि ने इस केस को दोबारा खुलवाया और अंजू की डायरी पुलिस को सौंपी, जिसके बाद इस केस में नया मोड़ आया. आनन-फानन में इलियासी पर दहेज के लिए प्रताड़ना का केस दर्ज किया गया, पर बाद में अंजू की मां ने कोर्ट से मांग की कि इलियासी पर हत्या का मामला चलाया जाए. हालांकि कोर्ट ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया, पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 2014 में निर्देश दिया कि सुहैब पर मर्डर का केस चलाया जाए.

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ख़ैर मर्डर के 17 साल बाद कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुना ही दिया, जिसमें इलियासी को दोषी माना गया है. अदालत ने इलियासी को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ 10 लाख रुपये अंजू के घरवालों को देने के लिए कहा है.