1994, जब भारतीय अर्थव्यवस्था नई दिशा की ओर चल पड़ी थी. सामाजिक बदलाव की गति रफ़्तार पकड़ चुक थी. देश-दुनिया में नई-नई चीज़ें घटित हो रहीं थी. दुनिया के मानचित्र पर भारत अपनी ख़ास उपस्थिति दर्ज करा रहा था. इन सब के बीच हैदराबाद के मध्यमवर्गिय परिवार से निकल कर एक 18 साल की लड़की अमेरिका में भारत का परचम लहरा रही थी. सुष्मिता सेन वो पहली भारतीय बन गईं थी, जिसके सिर पर मिस यूनिवर्स का ताज सजा था.

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आप अपने अनुभव से ये अंदाज़ा लगा सकते हैं कि एक 18 साल की लड़की मानसिक रूप से कितनी परिपक्व रही होगी. मेरा अनुमान है कि आप सुष्मिता की मानसिक परिपक्वता का ग़लत आंकलन करेंगे. इसकी वजह है मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के साक्षात्कार राउंड में दिया गया ये जवाब. जब 18 साल की सुष्मिता सेन से पूछा गया कि वो अगर उनके भीतर इतिहास के किसी घटना को बदल देने की काबलियत होती, तो वो किस घटना को चुनतीं. सुष्मिता काे जवाब ने जजों को प्रभावित किया, सुष्मिता का जवाब था- वो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या को रोक देती.

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इस एक जवाब से ये पता चलता है कि सुष्मिता की सोच कितनी सही थी. जो आगे चल कर उनके जीवन पर नज़र डालने से दिखता भी है. मिस इंडिया का ख़िताब जीतने के बाद जहां दुनिया उनके कदमों में थी, वहीं जब जवानी अपने शबाब पर थी, तब 25 साल की उम्र में सुष्मिता ने सिंगल मदर बनने का निर्णय लिया. भारतीय समाज में बिना शादी किए एक अकेली औरत के लिए बच्चा गोद लेना आज भी मुश्किल है, तब ऐसा सोचना भी सामाजिक गुनाह था. लेकिन सुष्मिता ने जो ठान लिया था वही किया, अपनी लड़ाई को वो कोर्ट के दरवाज़े तक ले गईं और मिसाल क़ायम की.

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आज सुष्मिता 2 बच्चों की मां हैं. अपने मातृत्व का उत्सव मनाने के लिए उन्होंने विवाह का रास्ता नहीं चुना और न ही किसी मर्द की ज़रूरत महसूस की. ऐसा नहीं कि उन्होंने अकेले रह कर अपने दायित्व के निर्वाह में कमी रखी हो. उनके इंस्टाग्राम पोस्ट को देख कर पेरेंटिंग सीखी जा सकती है. सुष्मिता हमेशा अपने बच्चों के लिए मुस्तैद खड़ी रहती हैं. सुष्मिता ने हमेशा अपनी ज़िंदगी को खुली किताब बनाए रखा. 42 साल की उम्र में सुष्मता दो लिव-इन रिलेशन्स में रह चुकी हैं. कभी भी उन्होंने अपने रिश्तों को मीडिया से छुपा कर नहीं रखा.

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हम उनकी फ़िल्मों की बात नहीं कर रहे, उनके मॉडलिंग करियर की तरफ़ नहीं झांकने जा रहे हैं. उन तमाम उपलब्धियों पर एक अलग लेख लिखा जा सकता है. उनके सामाजिक कार्यों को मी़डिया में बहुत कम पहचान मिली है. मीडिया की दिलचस्पी हमेशा सुष्मिता के निजी जीवन, शादी, रिलेशनशिप के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है. बहुत कम लोगों को पता है कि सुष्मिता सेन को उनकी सामाजिक कार्यों के लिए 2013 में मदर टेरेसा सम्मान और 2018 में I Am Woman Award दिया गया.

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सुष्मिता सेन सिनेजगत की उन हस्तियों में से हैं, जो समकालिन मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखती हैं. सुष्मिता का जीवन एक पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है.