'स्वच्छ भारत अभियान' बड़े ज़ोर-शोर से देश में लागू हुआ. इतना ही नहीं, सरकार हर बार एक सर्वे करवाती है, जिसके बाद सबसे साफ़ शहर की लिस्ट जारी होती है, इसी लिस्ट के साथ सबसे गंदे शहरों का भी नाम आता है. लेकिन इस सर्वे का आधार क्या होता है, इसकी जानकारी आम जनता को नहीं.

हर शहर की नगर पालिका की रिपोर्ट के हिसाब से अब तक इस सर्वे को करवाया जा रहा था. लेकिन जनवरी 2018 में होने वाले सर्वे के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नया प्लान बनाया है.

Source: indiatimes

इस बार नगर पालिका की जगह जनता बताएगी कि उनका शहर कितना साफ़ है. इसके लिए जनका के बीच सर्वे करवाया जाएगा और उनसे सफ़ाई के हालात पूछे जाएंगे.

इस सर्वे के लिए 4 हज़ार 41 शहरों को चुना गया है, जिसमें लगभग 40 करोड़ जनता से सवाल जवाब पूछे जाएंगे. इसका रिज़ल्ट 18 जनवरी 2018 तक जनता को मिल पाएगा.

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Housing And Urban Affairs Minister नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि 'इस सर्वे से जनता को जोड़ना एक सही फ़ैसला है. नगर पालिका अपने हिसाब से रिपोर्ट बना कर देती है. हम नहीं कहते कि रिपोर्ट गलत होती है, लेकिन जनता वही बताएगी जो वो देखेगी. इसके साथ ही जनता को जोड़ कर हम उन्हें सीधे-सीधे इस अभियान से भी जोड़ पाएंगे.'

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'स्वच्छ भारत अभियान' को सफ़ल करने के लिए ये एक अच्छा कदम है. लेकिन समझने वाली बात ये है कि सर्वे से अच्छा है कि इसके लिए कई तरीके निकाले जाएं, जिनसे पहले जनता को पूरी तरह जागरूक किया जा सके. वरना इन सर्वे और साफ़ शहर या गंदे शहर की लिस्ट की कीमत ही कुछ वक़्त में ख़त्म हो जाएगी.