इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में खेले गए 18वें एशियाई खेलों में एथलीट स्वप्ना बर्मन ने हेप्टैथलॉन स्पर्धा में भारत को गोल्ड मेडल दिलाया था. एशियाड में ये कारनामा करने वाली स्वप्ना भारत की पहली एथलीट हैं. शारीरिक रूप से फ़िट न होने के बावजूद इस मुकाम तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है.

स्वप्ना की कहानी है बेहद प्रेरणादायक

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पश्चिम बंगाल के एक ऑटो चालक की बेटी स्वप्ना ने ग़रीबी से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना ली है. स्वप्ना बेहद ग़रीब परिवार से हैं, उनके लिए खेल संबंधी महंगे उपकरण ख़रीदना, तो दूर की बात ट्रेनिंग का ख़र्च उठाना भी मुश्किल था. लेकिन कड़ी मेहनत के दम पर इस एथलीट ने वो कर दिखाया है, जो आज तक कोई अन्य खिलाड़ी नहीं कर पाया.

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स्वप्ना को मीठा बेहद पसंद है. वो चॉकलेट और मिठाईयों के बिना रह नहीं पाती हैं. ज़्यादा मीठा खाने की वजह से उनके दांतों में अकसर दर्द रहता है. एशियन गेम्स के दौरान भी वो दांत दर्द से जूझ रहीं थी. फ़ाइनल से तीन दिन पहले जब वो वॉर्म-अप सेशन के दौरान 100 मीटर की दौड़ में भाग लेने वाली थीं, उस दौरान उनका दर्द बहुत ज़्यादा बढ़ चुका था. फ़िज़ियोथेरेपिस्ट से सलाह के बाद वो फ़ाइनल में टेप लगाकर खेल रहीं थी. तेज़ दर्द के बावजूद उन्होंने भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता.

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ज़रा सोचिये तेज़ दर्द के बावजूद इस एथलीट ने 100, 200 और 300 मीटर की दौड़ पूरी की. भारी भरकम Javelin से ऊंचाई तक कूदना फिर मुंह के बल ज़मीन पर गिरना, स्वप्ना के लिए कितना पेनफ़ुल रहा होगा वो समय, लेकिन उन्होंने उफ़ तक नहीं की. दुनिया के बेस्ट एथलीट को हराकर इतनी बड़ी उपलब्धि अपने नाम की.

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स्वप्ना ने उस रात को याद करते हुए कहा, 'फ़ाइनल से एक रात पहले मैं बेहद परेशान थी. तेज़ दर्द के कारण में पूरी रात सो भी नहीं पाई थी. हर 30 सेकंड के बाद मुझे उठकर बाथरूम जाना पड़ रहा था. इस दौरान दर्द रोकने के लिए मैं लगातार गर्म, ठंडा और सॉल्टेड पानी पी रही थी कुछ देर दर्द रुकता फिर शुरू हो जाता. इसके बाद मैंने दांतों पर कोलगेट लगाया, पेनकिलर भी खाईं लेकिन इसका भी कोई असर नहीं हुआ. आज मैं उस पल को याद करती हूं, तो हंसी आती है लेकिन उस वक़्त वो मेरे लिए बेहद दर्दनाक था.'
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जबकि एशियन गेम्स से पहले स्वप्ना बैक पेन, घुटने के दर्द और टखने की इंजरी से भी जूझ रही थीं. उनका एशियन गेम्स में खेल पाना लगभग मुश्किल लग रहा था क्योंकि उनके घुटने का दर्द लेवल थ्री तक पहुंच चुका था. बावजूद इसके उन्होंने कड़ी मेहनत कर इस परेशानी से जल्द ही निजात पा ली.

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साल 2014 में भी उन्हें इंजरी से गुज़ारना पड़ा था, उस वक़्त उनकी इतनी भी हैसियत नहीं थी कि वो अपना इलाज़ करा सके. इसके लिए एक एनजीओ उनकी मदद को आगे आया. तब जाकर वो अपना करियर जारी रख पायी.

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स्वप्ना सिर्फ़ दांत दर्द से ही नहीं, बल्कि बचपन से एक और बड़ी समस्या से भी जूझ रही हैं. दरअसल, स्वप्ना के दोनों पैरों में 6-6 उंगलियां हैं, जिस कारण उन्हें सामान्य जूते पहनने में काफ़ी दिक्कतें होती है. बावजूद इसके उन्होंने आज तक इस समस्या को लेकर कभी कोई बहाना नहीं बनाया. उन्होंने इस समस्या को दरकिनार करते हुए सिर्फ़ अपने गेम पर ध्यान दिया. आज वो भारत की पहली खिलाड़ी बन गयी हैं जिसने एशियाड की हेप्टैथलॉन स्पर्धा में गोल्ड जीता है.

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जकार्ता में गोल्ड जीतने के बाद इस एथलीट ने भावुक होकर अपने लिए स्पेशल जूते बनाने की अपील की थी. उनकी इस अपील के बाद खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने 'भारतीय खेल प्राधिकरण' को निर्देश दिए थे. निर्देश मिलने के बाद SAI ने अब स्पोर्ट्स शूज़ बनाने वाली मशहूर कंपनी 'एडिडास' से करार किया है, जो इस एथलीट के 12 उंगलियों वाले पैरों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए हुए जूते तैयार करेगी.

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स्वप्ना ने मेडल जीतने के बाद कहा था कि 'मैंने ये पदक 'नेशनल स्पोर्ट्स डे' के मौक़े पर जीता है, इसलिए ये मेरे लिए बेहद ख़ास है. मैं अकसर सामान्य जूते ही पहनती हूं जिसमें पांच उंगलियों की जगह होती है. ट्रेनिंग के दौरान इसमें काफी परेशानी होती है, मुझे काफ़ी दर्द सहना पड़ता है.

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