पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम ज़िले से हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की एक अनूठी मिसाल सामने आई है. घोराधरा बस्ती के मंदिर में पूजा और मस्जिद में नमाज़ का नज़ारा अपने आप में बेहद अद्भुत है. दरअसल, यहां वर्षों पुराना शिव मंदिर और सईद ग़ुलाम चिश्ती की दरगाह एक ही जगह स्थापित है.

घोराधरा बस्ती के लोग धर्म और मज़हब की बातों से काफ़ी ऊपर ऊठ चुके हैं. झाड़ग्राम ज़िले की इस बस्ती में आपको प्यार और एकता के अलावा कुछ नज़र नहीं आएगा. एकता की इससे अच्छी मिसाल और क्या होगी कि शिव मंदिर में महामृत्युंजय मंत्र और मस्जिद में कुरान एक साथ पढ़ी जाती है. हर शाम भजन ख़त्म होने के बाद लोग ढोलक मंजिरे लेकर कव्वाली गाने लग जाते हैं.

अब आपको बताते हैं कि ये पूरा मसला है क्या और कैसे हुई इस अनूठी पहल की शुरूआत? दरअसल, साल 1986 में नारायणचंद्र नाम के एक शख़्स ने अपने घर में शिवमंदिर बनवाया था. बाद में वह एक मुस्लिम पीर से काफ़ी प्रभावित हुए जो कि 1994 में दिवंगत हो गए. मुस्लिम पीर की आख़िरी इच्छा का सम्मान करने के लिए आचार्य ने शिवलिंग के पास में ही उनकी मज़ार बनवाई दी.

पिछले 23 सालों से मंदिर और मस्जिद की देखरेख में लगे नारायण चन्द्र आचार्य बताते हैं कि 'वाकई यहां के हिंदू-मुस्लिम लोगों ने एक अनूठी मिसाल कायम की है. यहां किसी तरह का कोई धार्मिक संघर्ष नहीं है. धर्म के नाम पर दंगे फासद करने वाले लोगों को यहां ज़रूर आना चाहिए.'

Source : TOI

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