बेटा, तुमसे न हो पाएगा!

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मुझसे अगर कोई पूछे कि Cult Classic का दर्जा पा चुकी अनुराग कश्यप की गैंग्स ऑफ़ वासेपुर ने तुम्हें क्या दिया है, तो मैं कहूंगी, 'बेटा, तुमसे न हो पाएगा'. फ़िल्म में ये लाइन रामाधीर सिंह बने तिग्मांशु धुलिया ने अपने बेटे जेपी सिंह को बोली थी, लेकिन उस दिन के बाद से इस एक डायलॉग को हर किसी ने अपना लिया. हर Situation, हर Problem, किसी भी भसड़ में जब कुछ बोलने को न बचे, तो लोग इस ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल करते हैं.

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इस फ़िल्म के साथ जैसे ये डायलॉग अमर हुआ, वैसे ही अमर हो गया तिग्मांशु धुलिया का किरदार, रामाधीर सिंह, लेकिन जिस इंसान या कहूं किरदार के लिए ये डायलॉग बना था, उसके बारे में जानते हैं?

वासेपुर में रामाधीर सिंह के बेटे का किरदार निभाया था सत्यकाम आनंद ने. फ़िल्म में सत्यकाम का रोल ज़्यादा लम्बा नहीं था, लेकिन दिग्गजों की फ़ौज वाली वासेपुर में लोगों को आज भी ये किरदार याद है. इनके बारे में कुछ ढूंढने की कोशिश की, तो ये जल्दी से मिले नहीं. Google से थोड़ी ज़्यादा मदद मांगी, तो नाम सामने आया सत्यकाम आनंद.

फ़िल्म में ये ऐसे दिखे थे:

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असल में ऐसे दिखते हैं:

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सत्यकाम आनंद मूलतः बिहार के आरा से हैं. टीचरों की Family से आते हैं, इसलिए 'नाटक-नौटंकी' में आना एक सुखद एक्सीडेंट था. इनके ब्लॉग में पढ़ा था कि शहर के अच्छे कॉलेज में एडमिशन के लिए इन्हें कॉलेज के प्रिंसिपल, क्लर्क और बाकी लोगों को नाटक कर ये यकीन दिलाना पड़ा कि ये नाटक करते हैं.

वासेपुर के अलावा सत्यकाम आनंद को लोग 'Recycle Mind' और 'Shorts' में देख चुके हैं.

फिल्मों के अलावा भोजपुरी सिनेमा की छवि सुधारने से जुड़े एक बड़े कैंपेन की शुरुआत सत्यकाम कर चुके हैं. उनका मकसद भोजपुरी सिनेमा में भरे फूहड़पन को ख़त्म करना और रीजनल सिनेमा की ताकत को दुनिया के सामने लाना है.

जिस लगन से सत्यकाम इस काम को कर रहे हैं, उसके लिए बस ये ही कहेंगे, 'बेटा, तुमसे हो पाएगा'.