बर्फ़ीली चोटियों वाला प्रदेश, हिमाचल प्रदेश. कुछ दिनों बाद वहां चुनाव होने वाले हैं. चुनाव प्रचार भी ज़ोरों-शोरों से चल रहा. मित्रों.... कांग्रेस फलना, ढिमाका वाले वीडियो भी देखने को मिल रहे हैं. मोटा-मोटा समझा जाए तो चुनाव से पहले जो पूरे देश में होता आया है वही हो रहा है, कुछ नया नहीं.

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले में है एक गांव, कल्पा. ये गांव और इस गांव के श्याम शरण नेगी का नाम इतिहास में दर्ज है. कारण? श्याम शरण नेगी आज़ाद भारत के वो पहले शख़्स हैं, जिन्होंने सन् 1951 में पहला वोट डाला था. श्याम जी का जन्म 1 जुलाई, 1917 को हुआ था, इस हिसाब से आज ये 100 साल के हो चुके हैं. श्याम जी एक सेवानिवृत्त स्कूल टीचर हैं. 1951 में जब आज़ाद भारत में पहला चुनाव हुआ, तब श्याम जी ने सबसे पहले मतदान किया था.

बाएं से दूसरे व्यक्ति हैं श्याम शरण जी-

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1947 में देश को ब्रिटिश राज से आज़ादी मिली. 1952 फरवरी में देश में पहला चुनाव करवाने का निर्णय लिया गया. फरवरी यानी कि सर्दियों का मौसम, इस वक़्त पहाड़ों पर भारी बर्फ़बारी होती है. इसी कारण तय वक़्त के करीब 5 महीने पहले हिमाचल में चुनाव करवाए गए. हिमाचल के श्याम शरण नेगी को देश के सबसे पहले मतदाता के रूप में चुना गया.

श्याम जी ने हिमाचल में हुए हर चुनाव में वोट दिया है. इस हिसाब से श्याम जी ने लगभग 16 लोकसभा और 12 विधानसभा चुनावों में अपना वोट डाला है.

उम्र के इस पड़ाव पर आकर अब उनकी हिम्मत जवाब देने लगी है. श्याम जी का कहना है कि अगर उनकी तबियत ठीक रही तो वो आने वाले हिमाचल विधानसभा चुनाव में भी मतदान करेंगे.

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पीटीआई से बात करते हुए श्याम के सबसे छोटे बेटे प्रकाश ने बताया,

मेरे पिताजी 9 नवंबर को मतदान करने की पूरी तैयारी कर रहे हैं. उन्हें आज भी वो दिन याद है जब उन्होंने पहली दफ़ा मतदान किया था. हर बार वोट डालते वक़्त उन में वही उत्साह देखने को मिलता है.

श्याम जी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को बहुत पसंद करते हैं. उनका कहना है युवा पीढ़ी को भी अपना क़ीमती वोट ज़रूर डालना चाहिए, ताकि सत्ता में अच्छे नेता आएं. वो यह भी कहते हैं कि जब उन्होंने पहली बार वोट किया था तब से अब तक बहुत कुछ बदल गया है.

श्याम जी कहते हैं,

मुझे वो वक़्त आज भी याद है. उस वक़्त इतने स्कूल भी नहीं हुआ करते थे. मीलों चलकर स्कूल जाना पड़ता था. अब दूर-दराज़ के गांवों में भी स्कूल बन गए हैं. मुझे सबसे ज़्यादा खुशी इस बात की होती है कि लड़कियों की शिक्षा पर भी अब ज़ोर दिया जाने लगा है. पहले के ज़माने में उन्हें घर की चारदिवारी में ही बंद रखा जाता था.
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श्याम जी को स्टेट इलेक्शन कमीशन ने अपना ब्रैंड एम्बेसडर बनाया था. वो युवा पीढ़ी को वोट डालने के लिए प्रेरित करते हैं.

प्रकाश ने आगे बताया,

पिताजी ख़ुद को कुंए का मेंढक कहते हैं क्योंकि वो हिमाचल के बाहर सिर्फ़ हरिद्वार तक गए हैं. वे अपनी ही दुनिया में रहते हैं. खाना-पीना भी कम कर दिया है, पर उन्हें चाय बेहद पसंद है. रेडियो पर न्यूज़ सुनना उन्हें बेहद पसंद है, उनको टीवी से उतना लगाव नहीं है.

किन्नौर के डिप्टी कमीश्नर डॉ. नरेश कुमार लट्ठ, जो कि इस ज़िले के Electoral Officer भी हैं ने बताया,

श्याम जी का पोलिंग स्टेशन के गेट पर भव्य स्वागत किया जाएगा. उन्हें किन्नौरी टोपी, शॉल और मेमेंटो से सम्मानित किया जाएगा. इसके अलावा उनके लिए लाला कारपेट भी बिछाया जाएगा.
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2014 में Google India ने एक वीडियो रिलीज़ किया था, #PledgeToVote with Mr.Shyam Negi. वीडियो भावनात्मक था, क्योंकि वीडियो में इतने उम्रदराज़ व्यक्ति होने के बावजूद श्याम वोट देने के लिए तैयार हो रहे हैं. आज भी इस देश में ना जाने कितने ही 18 वर्ष और उससे ऊपर के लोग हैं जिनके पास वोटर आईकार्ड तक नहीं है. कुछ तो इतने महान हैं कि छुट्टी है कहकर वोट डालने नहीं जाते.

श्याम जी प्रेरणा हैं उन लोगों के लिए जो ये समझते हैं कि वोट की कोई ताकत नहीं है. हमें अपना नेता चुनने की आज़ादी दिलाने के लिए न जाने कितनों ने ही अपनी लाशें बिछा दीं. गणतंत्र में विश्वास रखें, बदलाव ज़रूर आएगा.

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