2017 के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों ने दिल्ली को महिलाओं के लिए सबसे अनसेफ़ यानि असुरक्षित शहर बताया था. दिल्ली का क्राइम रेट पूरे देश के क्राइम रेट का डबल, रेप केस में दिल्ली प्रमुख 19 शहरों में सबसे ऊपर था. आज दिल्ली के कुल 14 ज़िलों में से 4 ज़िलों में महिलाएं डीसीपी हैं. हालांकि दिल्ली में अभी भी सभी सेक्टर्स में महिलाओं के काम करने की संख्या सिर्फ़ 11% ही है.

असलम ख़ान (नॉर्थ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट)

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दिल्ली के इतिहास में ऐसा पहली बार है कि 4 डीसीपी महिलाएं हैं. इनमें असलम खान राजस्थान से, मोनिका भारद्वाज हरियाणा से, नुपुर प्रसाद बिहार से और मेघना यादव दिल्ली से हैं. असलम ख़ान दिल्ली नॉर्थ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट, मोनिका भारद्वाज वेस्ट दिल्ली डिस्ट्रिक्ट, नुपुर प्रसाद नॉर्थ दिल्ली डिस्ट्रिक्ट और मेघना यादव शाहदरा डिस्ट्रिक्ट से डीसीपी हैं.

मोनिका भारद्वाज (वेस्ट दिल्ली डिस्ट्रिक्ट)

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वेस्ट दिल्ली ज़िले की डीसीपी मोनिका भारद्वाज का कहना है कि 'ये बहुत ही चैलेंजिग जॉब है, क्योंकि हर वक्त आपको काम करना है.' नुपुर प्रसाद कहती हैं 'हम चारों में एक बात सबसे कॉमन है, वो ये कि हम सभी मां हैं. सभी को अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल ज़िंदगी में बैलेंस बनाना पड़ता है, जो कि काफ़ी टफ़ होता है.'

मेघना यादव (शाहदरा डिस्ट्रिक्ट)

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दिल्ली में बढ़े Cases की संख्या पर नुपुर कहती हैं कि 'महिलाओं के ख़िलाफ़ क्राइम की संख्या बढ़ी है. जो कि अपने आप में एक चैलेंज है. जब मुझे ये कार्यभार सौंपा गया, तो पहले मैंने नशा करने वाले ड्रग डीलर्स को पकड़ने का अभियान चलाया.'

वहीं मेघना यादव ने 4 ज़िलों में महिला डीसीपी होने पर कहा कि 'हम बेहतर हो रहे हैं. जल्द ही वो दिन भी आएगा जब सभी ज़िलों में महिला डीसीपी होंगी. हमें इसे नॉर्मल तरह से देखना चाहिए. हालांकि इस बात को भी नहीं कहा जा सकता कि शीर्ष स्थानों पर महिलाएं नियुक्त होने से क्राइम कम हो जाएगा.'

नुपुर प्रसाद (नॉर्थ दिल्ली डिस्ट्रिक्ट)

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मेघना कहती हैं कि 'मुझे दिन में कई पुरुष ऑफ़िसर से मिलना होता है. सभी अलग-अलग बैकग्राउंड के होते हैं. कई ऑफिसर्स को महिलाओं से कैसे बात करनी चाहिए, ये भी सीखने की ज़रूरत है. ये सिर्फ़ तभी होगा जब वो अपने घर से शुरुआत करेंगे. हालांकि निर्भया रेप केस के बाद पुलिस में काफ़ी सतर्कता आई है. दिल्ली में महिलाएं पूरी तरह से सुरक्षित हों, इस चीज़ में अभी समय लगेगा.'

सोशल मीडिया पर महिलाओं के शोषण पर मोनिका भारद्वाज कहती हैं कि 'सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां कई सारी फे़क न्यूज़ को सर्कुलेट किया जाता है. एक पुलिस ऑफ़िसर होने के नाते हम सिर्फ़ क्राइम नहीं सुलझाते, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से कई पॉज़िटिव कैंपेन भी चलाते हैं.'

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