हिन्दुस्तान बदल रहा है, वाकई बदल रहा है. इसे हम और आप मिल कर बदल रहे हैं. संचार और तकनीक के इस युग में शहरों की भांति गांवों का भी विकास हो रहा है. स्मार्टफोन के अलावा अब गांवों में कंप्यूटर भी आम हो चुका है. सबसे अच्छी बात ये है कि इससे कई समस्याओं का निदान भी हो रहा है. तकनीक के अलावा ऊर्जा के क्षेत्र में भी देश के कई ऐसे गांव हैं, जो पूरी तरह से आत्मनिर्भर हैं. सरकार की कोशिशों के अलावा आम लोगों की सोच ने नए हिन्दुस्तान को जन्म दिया है. हम आपको हिन्दुस्तान के कुछ ऐसे गांवों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो संचार और ऊर्जा के क्षेत्र में अन्य गांवों से काफ़ी अलग हैं.

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में देश में क़रीब 35 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. फ़िलहाल 88 प्रतिशत शहरी आबादी की पहुंच इंटरनेट तक है. हालांकि देश की वर्तमान आबादी 1.28 अरब के आस-पास है. आइए, अब देश के उन महत्वपूर्ण गांवों के बारे में जानते हैं, जो आजकल डिजिटल इंडिया में धूम मचा रहे हैं.

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स्टोरी-1

मशहूर क्रांतिकारी लाला लाजपत राय का पैतृक गांव 'ढुडीके' देश का पहला ‘डिजिटल गांव’ बन गया है. इस गांव में Wi-Fi इंटरनेट सेवा की शुरूआत हो चुकी है. आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि पंजाब नेशनल बैंक के संस्थापक 'लाला लाजपत राय' ही थे.

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स्टोरी-2

झारखंड के रांची ज़िले स्थित 'हुटुप गांव' आज विश्व में विख्यात है. इसकी सबसे बड़ी वजह यहां के युवा हैं, जो अमेरिका और स्पेन घूम रहे हैं. इंटरनेट के कारण यहां के बच्चे स्कूल और कॉलेज जाने के बजाय, कंप्यूटर से ही पढ़ने लगे. इंटरनेट की मदद से ये बच्चे पूरी दुनिया में विकास की नई इबारत लिख रहे हैं.

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स्टोरी-3

अलीगढ़ का 'भूरा किशनगढ़ी गांव' भारत का एक ऐसा गांव बन गया है, जहां 24 घंटे इंटरनेट की सुविधा है. दरअसल, इस गांव का चयन 'ई-विलेज' के लिए हुआ था.

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स्टोरी-4

छत्तीसगढ़ का बलरामपुर जिला पूरी तरीके से डिजिटल हो गया है. बलरामपुर प्रदेश का पहला और देश का दूसरा ऐसा जिला है, जहां की सभी ग्राम पंचायतों में इंटरनेट सेवा आरंभ कर दी गई है.

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साहित्यकार केदारनाथ सिंह ने सच ही कहा है कि "मुझे आदमी का सड़क पार करना हमेशा अच्छा लगता है क्योंकि इस तरह एक उम्मीद-सी होती है कि दुनिया, जो इस तरफ़ है, शायद उससे कुछ बेहतर हो सड़क के उस तरफ." सूचना एवं प्रौद्योगिकी के अलावा देश ऊर्जा के क्षेत्रों में भी काफ़ी पिछड़ा हुआ है. हालांकि, कई गांवों ने ऊर्जा के लिए नवीन स्रोतों को चुना है.

उदाहरण-1

देश में बिहार को सबसे पिछड़ा राज्य माना जाता है. हालांकि, कई मामलों में यह राज्य सभी राज्यों से आगे है. बिहार के जहानाबाद ज़िले स्थित धरनई गांव, देश का पहला ऐसा गांव बन गया है, जो सौर ऊर्जा से संचालित है. पिछले 30 सालों से इस गांव में बिजली नहीं थी.

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उदाहरण-2

बुंदेलखंड के छोटे से गांव रामपुरा की गलियां हमेशा जगमग रहती हैं. यहां बिजली कभी नहीं जाती, क्योंकि यह पूरा का पूरा गांव सोलर एनर्जी से चमकता रहता है. इतना ही नहीं, आज रामपुरा में आटा-चक्की से लेकर टीवी और रेडियो तक सौर ऊर्जा से ही चल रहे हैं. रामपुरा भारत का दूसरा ऐसा गांव है, जो पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर निर्भर है.

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संचार एवं ऊर्जा ही लोगों की ऐसी ज़रूरत है, जो हमें अंतर्राष्ट्रीय पटल पर सबके सामने खड़ी कर सकती है. देश की तरक्की के लिए ऊर्जा और इंटरनेट ज़रूरी है. उम्मीद है कि आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा. आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हैं.