जैसा हर साल होता है, इस साल भी हुआ. इतिहास एक साल बड़ा हो गया. कुछ नामी हस्तियों का साथ छूट गया, तो कुछ नए लोग सफ़र पर चल निकले. नए चेहरों ने अपनी पहचान बनाई, नाम कमाया.

2017 लगभग अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है. और इस साल भी कुछ चुनिंदा लोगों ने इस साल पर अपनी छाप छोड़ी. ख़बरों का हिस्सा बनें. इंटरनेट पर शेयर किए गए, तो कुछ ने अपने काम का लोहा मनवाया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौन हैं ये लोग? कोई बात नहीं हम मिलवाते हैं आपको इन लोगों से

गुरमेहर कौर

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इस साल फरवरी महीने में गुरमेहर कौर का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ. ये वीडियो भारत-पाक रिश्तों पर था. इस वीडियो को ग़लत संदेश के साथ पेश कर के वायरल किया गया. वीडियो के माध्यम से अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल उठाए गए. अक्टूबर में टाइम पत्रिका ने 10 Next Generation Leader लिस्ट में गुरमेहर कौर का नाम एक अभिव्यक्ति की आज़ादी के योद्धा के तौर पर लिखा.

मानुषी छिल्लर

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17 साल के बाद एक भारतीय ने मिस वर्ल्ड ख़िताब अपने नाम किया. 23 वर्षीय मानुषी छिल्लर हरियाणा की रहने वाली हैं. मानुषी से प्रतियोगिता के अंतिम दौर में सवाल पूछा गया कि कौन सा पेशा सबसे ज़्यादा सैलरी डिज़र्व करता है? मानुषी का जवाब था 'मां'. इस जवाब के साथ मानुषी ने लोगों का दिल और मिस वर्ल्ड का ताज़ अपने नाम किया.

जिगनेश मेवानी

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जब गुजरात के उना में कुछ दलितों को मारा गया तब जिगनेश मेवानी ने घोषणा की कि अब से दलित वर्ग कोई भी ऐसा काम नहीं करेगा जिसे ये समाज गंदा मानता है. जिगनेश ने दांडी यात्रा की तर्ज पर 'दलित अस्मिता यात्रा' शुरु की. पत्रकार, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता के बाद अब गुजरात में चुनाव जीतने के बाद विधायक बन चुके हैं. जिगनेश को दलितों का नया नेता माना जा रहा है.

रामनाथ कोविंद

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भारत के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राजनीति में नया नाम नहीं है. इससे पहले वो बिहार के राज्यपाल भी रह चुके थे. लेकिन जब भाजपा की तरफ से रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित किये जाने के फ़ैसले ने सब को चौंका दिया. राष्ट्र पटल पर उनका नाम आना सबके लिए अचानक ही था.

श्याम रंगीला

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स्टैंडअप कॉमेडी करने वाले श्याम रंगीला ने इस साल शोहरत भी बटोरी और कॉन्ट्रोवर्सी के भी शिकार हुए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नकल करने के लिए मशहूर ये कलाकार अचानक से ख़बरों का हिस्सा बन गया. सब तरफ उसकी प्रतीभा का सम्मान किया जा रहा था. तभी ख़बर आती है कि एक मनोरंजन टीवी चैनल ने राजनीतिक झमेलों से बचने के लिए श्याम रंगीला को अपने शो में नरेंद्र मोदी की नकल उतारने से रोक दिया.

याहया बूटवाला

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'तो शायद तुम ग़लत हो', आपने याहया बूटवाला का नाम नहीं सुना होगा लेकिन ये कविता ज़रूर सुनी होगी. यूट्युब, वाट्सएप या फेसबुक कहीं न कहीं आपने इस कविता की तारीफ़ की होगी. यूट्युब पर इस कविता की 6 मिलियन व्यूज़ हैं. इस साल याहया के और भी कई कविताएं लोगों ने पसंद की. साईकल, क्या कूदना ज़रूरी था? को भी लोगों ने सराहा.

धीरज सिंह

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भारत में फुटबॉल के दर्शक सीमित मात्रा में हैं. दुनिया का सबसे मशहूर खेल भारत में अब तक अपना नाम नहीं कमा पाया. लेकिन धीरज सिंह जैसे खिलाड़ी इस खेल को मिलते रहें, तो जल्द ही फुटबाल का सामराज्य भारत में भी फैलेगा. इस साल भारत में अंडर-17 फुटबॉल वर्ल्डकप का आयोजन हुआ था. धीरज भारतीय खेमे में गोलकीपर के तौर पर जुड़े थे. टूर्नामेंट में भारत का सफ़र पहला पायदान भी नहीं पार कर पाया लेकिन धीरज ने अपनी प्रतिभा से लंबी छलांग लगाई और उसे विदेशी फुटबॉल क्लबों से न्योते मिलने लगे.

शुभाशीष भूटियानी

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इस साल रीलिज़ हुई 'मुक्ति भवन' उन फ़िल्मों में से है जो सिनेमा हॉल में बैठ कर दर्शकों की राह तकती है और बाहर आलोचक वाह-वाही करते नहीं थकते. अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म फ़ेस्टिवल्स में दर्शकों ने 'मुक्ती भवन' को कई पुरस्कार और स्टैंडिंग ओवेशन मिलें. इस फ़िल्म के निर्देशक थे 25 वर्षीय शुभाशीष भूटियानी, ये उनकी पहली फ़िचर फ़िल्म थी. इससे पहले इनकी शॉट फ़िल्म 'कुश' ऑस्कर में अपनी कैटेगरी में टॉप 10 तक पहुंची थी.

वाशिंगटन सुंदर

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हाल ही में समाप्त हुई भारत-श्रीलंका क्रिकेट सीरिज़ में ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर ने टी-20 में पर्दापण किया. इसके साथ ही सुंदर सबसे कम उम्र के भारतीय टी-20 खिलाड़ी बन गए. इस साल उन्होंने अब तक सिर्फ़ एक अंतरराष्ट्रीय मैच खेला. लेकिन इससे पहले वो आईपीएल में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं. पुणे सुपरजाइंट की तरफ़ से खेलते हुए सुंदर ने कई अच्छी पारियां खेलीं और सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. तमिलनाडु की ओर से प्रथम श्रेणी मैच में भी सुंदर ने इसी साल पर्दापण किया. इससे पहले ये भारत के अंडर-19 टीम का हिस्सा रह चुके हैं.

सराहाह

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ये कोई इंसान नहीं एक सोशल नेटवर्किंग ऐप है. इसका ज़िक्र इसलिए ज़रूरी है क्योंकि आने वाले साल में इसे ज़रूर याद किया जाएगा. इसकी वजह से हर किसी की फेसबुक टाइमलाइन सराहाह के मैसेज से पटी हुई थी. इस ऐप की ख़ासियत है कि इसके ज़रिए आप अपनी पहचान उजागर किए बिना किसी को भी संदेश भेज सकते हैं. सराहाह की शोहरत वाली ज़िंदगी बस हफ़्ते भर की थी लेकिन इतने में ही ये यादगार बन गया.

आने वाला साल नए लोगों को लेकर आएगा. नई कहानियां बनेंगी.