'हम साथ-साथ हैं', यानि सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनी वो फ़िल्म, जिसे आज भी देखो तो बोरियत नहीं होती. 1999 में आई ये फ़िल्म एक फ़ैमिली ड्रामा थी. मोहनीश बहल, सलमान खान, सैफ़ अली खान, तब्बू, करिश्मा कपूर, आलोक नाथ, रीमा लागू जैसे सितारों से सजी इस फ़िल्म को आये 18 साल हो चुके हैं पर आज भी ये इस जेनरेशन के ज़्यादातर बच्चों के बचपन की यादों का हिस्सा है. आज भी जब अंताक्षरी में 'म' से गाना गाना होता है, तो लोगों की जुबां पर इस फ़िल्म का 'मैया यशोदा' गीत ज़रूर आता है.

उस वक़्त ये फ़िल्म बड़ी हिट साबित हुई थी, लेकिन ऐसी कई बातें हैं इस फ़िल्म में, जो आज की जेनरेशन कहीं न कहीं भूलती जा रही है. 

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ये हैं वो बातें जो 'हम साथ-साथ हैं' फ़िल्म से हम सीख सकते हैं:

1. संयुक्त परिवार में रहने का आनंद

इस फ़िल्म में एक संयुक्त परिवार को एक छत के नीचे हंसी-ख़ुशी रहते दिखाया गया है. आम परिवारों की तरह इस परिवार में भी छोटी-मोटी परेशानियां आती हैं, लेकिन अंत में सब एक हो जाते हैं. आज लोग संयुक्त परिवार के कॉन्सेप्ट से दूर होते जा रहे हैं, लेकिन संयुक्त परिवार में रहने का भी अपना अलग सुख है.

2. एकता

आज ज़रा-ज़रा सी बातों पर परिवारों में बंटवारे होना बहुत आम हो गया है. लोग परिवार की एकता को महत्व देना भूल चुके हैं, लेकिन ये फ़िल्म पारिवारिक एकता का पाठ बहुत मनोरंजक अंदाज़ में सिखाती हैं.

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3. साथ पूजा करना और खाना खाना

शायद ही आज किसी परिवार में लोग सुबह साथ में पूजा करते हों, लेकिन इस फ़िल्म में पूरा परिवार साथ पूजा करते दिखाया गया था. पूरा परिवार साथ बैठ कर खाना खाए, तो खाने का मज़ा दोगुना हो जाता है.

4. परिवार के साथ एन्जॉय करना

फ़िल्म में जब सभी लोग एक बस में बैठ ट्रिप पर जाते हैं या घर में ही सब मिल बैठ कर बात करते हैं, तो देख कर कितना अच्छा लगता है. लेकिन आजकल लोग फ़ैमिली के साथ एन्जॉय करना भूल चुके हैं.

5. मेहमानों को बोझ न समझना

आज लोग मेहमानों के आने की ख़बर से ही टेंशन में आ जाते हैं. ज़्यादातर का सोचना होता है कि मेहमानों के आने से काम बढ़ जाता है, लेकिन फ़िल्म में दिखाया गया है कि मेहमानों के आने से कुछ और हो न हो, घर की रौनक ज़रूर बढ़ जाती है.

6. अपने भाई-बहन को प्यार जताने का कोई मौका नहीं छोड़ना

आपके भाई-बहन आपके बेस्ट फ्रेंड साबित हो सकते हैं. हम फिर भी उन्हें प्यार जताने से कभी-कभी झिझकते हैं. फ़िल्म से हम सीख सकते हैं कि अपने प्यारे भाई-बहन को प्यार दिखाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहिये.

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7. माता-पिता को उल्टा जवाब न देना

फ़िल्म में बच्चे किसी भी बात के लिए अपने माता-पिता को उल्टा जवाब नहीं देते, भले ही वो ग़लत रहे हों. ये सच भी है कि माता-पिता के प्यार से बड़ा दुनिया में कोई आशीर्वाद नहीं. इसके लिए आप भगवान का जितना शुक्रिया अदा कर लें, कम है.

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फ़िल्म क्रिटिक्स चाहें इस फ़िल्म के बारे में जो भी कहें, इसमें सीखने के लिए बहुत कुछ है.