सबसे पहले वो अपने शिकार को ढूंढते थे, उसपर नज़र रखते थे उसके बाद मौक़ा लगते ही उस व्यक्ति का मोबाइल लेकर गायब हो जाते थे. 14 लोगों के एक परिवार का फ़ैमिली बिज़नेस था मेट्रो ट्रेन में सफ़र कर रहे लोगों के मोबाइल को चुराकर बेचना. दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा मोबाइल चोरों का एक गिरोह.

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खबर है कि दिल्ली पुलिस ने एक मोबाइल चोर गिरोह को पकड़ा है. इस गिरोह के सभी सदस्य आपस में रिश्तेदार हैं. चाचा, भतीजा, फूफा और मामा भांजा सभी इस गिरोह में शामिल हैं. कश्मीरी गेट पुलिस के अनुसार, गिरोह के सभी सदस्य मेट्रो ट्रेन में यात्रियों के मोबाइल पार करते थे.

ये पूरा परिवार आगरा में रहता है और एक महीने में 1 या 2 बार दिल्ली आता है और 20-25 मोबाइल चुराकर वापस आगरा चला जाता है और वहां चुराए हुए सारे फ़ोन बेच देता है. पुलिस ने इन सभी चोरों को पकड़ लिया है. गिरोह में शामिल 14 लोगों में 8 सदस्य नाबालिग हैं, जबकि बाकी बालिग़ हैं.

पुलिस ने बताया कि ये सभी दिल्ली में अलग-अलग रूट की मेट्रो में सफ़र करते थे. मौका मिलते ही यात्रियों के मोबाइल चुरा लेते थे. इसके अलावा जांच में पता चला कि इस गैंग का हर सदस्य 1 दिन में कम से कम 6 मोबाइल चुराता था. और अगर इनका टारगेट पूरा नहीं तो ये उस दिन दिल्ली में ही रुकते थे और दूसरे दिन फिर अपने काम पर लग जाते थे.

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18 सितम्बर को कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर एक यात्री का मोबाइल चोरी हो गया था. तभी दूसरे स्टेशन पर बच्चन सिंह नाम के एक चोर को पकड़ लिया गया, जिसे उस व्यक्ति ने पहचान लिया जिसका फ़ोन चोरी हुआ था. पूछताछ के दौरान इस चोर ने अपने बाकी साथियों के बारे में भी बता दिया, जिसके बाद एक पार्क से उन लोगों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इन लोगों के पास कई सारे मोबाइल फ़ोन मिले हैं, जिन्हें ज़ब्त कर लिया गया है.

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गौरतलब है कि ये सभी लोग आगरा में अपने गांव में काम भी करते थे और एक महीने में 1 या 2 बार दिल्ली आते थे और चोरी करते थे. इसके लिए ये पूरी प्लानिंग भी करते थे. पहले टारगेट चुनते थे, उसके बाद भीड़ में उसका पीछा करते हुए उसके पास खड़े हो जाते थे और मौका मिलते ही फ़ोन गायब कर अपने दूसरे साथ को दे देते थे और वो फ़ोन को लेकर वहां से निकल जाता था.

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