हमारी खुशी का कोई हिसाब नहीं है, वो छोटी से छोटी आदतों में भी हो सकती है और महंगी से महंगी लक्ज़री में भी. कई लोग करोड़पति होते हुए भी खुश नहीं होते और कोई सेकंड हैंड स्कूटर को खरीद कर भी खुश है. अपने से देखें तो हमारी खुशी का कोई पैमाना नहीं है. लेकिन अमेरिका ने साल 2012 में एक संस्था Sustainable Development Solutions Network (SDSN) नाम की बनाई थी, जो दुनियाभर के सभी देशों का सर्वे करती है और उन्हें उनकी खुशी के हिसाब से रैंक करती है. ये सर्वे छह आधारों पर होता है, जिसमें प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद, स्वस्थ जीवन की उम्मीद, आज़ादी, उदारता, सामाजिक सहयोग और सरकार या व्यापार में भ्रष्टाचार की अनुपस्थिति शामिल है.

इस सर्वे के परिणाम भारत के लिए चौंकाने वाले थे और पाकिस्तान के तो और भी ज़्यादा तोते उड़ाने वाले.

खुशियों की इस रेस में भारत काफ़ी पीछे रह गया दोस्त. बाज़ी तो नॉर्वे मार गया!

Source: b'Source: WikiCommons'

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