भारत ने आज़ादी के 70 सालों में 5 बड़ी जंग लड़ी हैं, जिसमें भारत को सबसे ज़्यादा नुकसान चीन के साथ हुई लड़ाई से हुआ था. 1962 की इस जंग ने हमारे देश को काफ़ी पीछे ढकेल दिया. हमारे कई जवान शहीद हुए और आर्थिक व्यवस्था की कमर टूट गई.

लेकिन चीन के एक फ़ौजी ने इस जंग में अपना सब कुछ खो दिया. युद्ध के बाद 1963 में Wang नाम के इस फ़ौजी को भारत की सीमा के अंदर हिसारत में लिया गया. करीब 6 साल तक उस पर जासूसी का केस भी चलाया गया. लेकिन कोर्ट में इसे साबित नहीं किया जा सका.

साल 1969 में कोर्ट ने इन्हें बरी कर दिया और यहां से शुरू हुई Wang की राज बहादुर बनने की कहानी. Wang ने एक भारतीय लड़की से शादी की और भारतीय नागरिकता को भी अपना लिया.

Wang बताते हैं कि वो चीन की तरफ़ से सेना के लिए सड़क बनाने का काम करते थे, लेकिन युद्ध की समाप्ति के बाद वो अपनी बटालियन के साथ वापस न जा सके. एक दिन भूख और प्यास से तड़पते हुए उन्हें Red Cross की एक गाड़ी दिखी, जिससे उन्होंने मदद मांगी. लेकिन मदद करने के बजाए उस गाड़ी ने उन्हें भारतीय सेना को सौंप दिया.

भारतीय आर्मी के अधिकारी बताते हैं कि Wang को हिरासत में लेने के बाद जब पूछताछ की गई, तब उनके पास सारे दस्तावेज नकली थे. उन्हें सालों तक देश की अलग-अलग जेल में रखा गया था.

लेकिन जेल से बाहर आने के बाद वो चीन वापस नहीं जा पाए और मध्य प्रदेश के एक गांव तिरोडी में रहने लगे. उन्होंने अपने परिवार को कई खत लिखे, लेकिन इन खतों का जवाब उन्हें 1980 में पहली बार मिला. करीब 40 सालों बाद, Wang ने अपनी मां की आवाज़ साल 2002 में फ़ोन पर सुनीं.

इन सालों में Wang ने कई बार चीन जाने की कोशिश की. लेकिन कोई भी दस्तावेज नहीं होने के कारण वो नहीं जा पाए. जब उनसे पूछा गया कि क्या आज भी आपको चीन जाने का मन करता है , तो Wang ने कहा. 'मेरा परिवार भारत में है, मैं कहां जाऊंगा'.

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