औरत का सम्मान जिस देश की परंपरा रही है, जहां हमें बचपन से सिखाया जाता है कि औरत ही सृष्टि की शक्ति है, वहां औरतों की तरफ़ उठने वाली हर नज़र एक्स-रे की तरह होती है. जिसे देखो वही महिलाओं को तरह-तरह की सलाह देता नज़र आता है. सभी इस गफ़लत में हैं कि औरत को सुधारने, संस्कारित करने और उसके कारण बिगड़ रही पीढ़ी को बचाने के लिए वे महिलाओं को मशविरा दे सकते हैं. ऐसा हो भी क्यों न? उनकी नज़र में हमारे इर्द-गिर्द होने वाले हर अपराध के लिए औरत ही तो ज़िम्मेदार है. वे कुछ भी कर सकते हैं, कहीं भी आ-जा सकते हैं. कुछ भी खा-पी और पहन सकते हैं, लेकिन औरत... इनमें से कोई भी काम करने के लिए आज़ाद नहीं है, क्योंकि मर्दों को ऐसा ठीक नहीं लगता.

अब एक नयी 'सनसनी' पैदा की है मर्दों ने. अरे नहीं, शायद इनके अन्दर औरतों के कपड़ों ने सनसनी पैदा कर दी है. कांग्रेस में दक्षिण कन्नड़ डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट इब्राहीम कोदिजल कहते हैं कि, 'औरतों को अपना शरीर पूरी तरह ढंककर रखना चाहिए. वर्ना मर्दों के अंदर सनसनी पैदा होती है.' अब तक तो यही सुना था कि रेप की वजह महिलाएं खुद हैं, वे अपराधों को कम कर सकती हैं, आदि. अब ये बात भी इन्होंने क्लियर कर दी कि औरतें ऐसा क्या करती हैं कि उनका रेप करना ज़रूरी हो जाता है. मेरा मतलब कि उन्हें अपने ही साथ रेप करने के लिए कुछ करना होता है, जिससे शरीफ पुरुष अपनी शराफ़त छोड़ दे और उनके साथ रेप करे. अब तक ये बात नहीं पता थी कि औरतें अगर ऊपर से नीचे तक ढंकी न हों, तो पुरुष के शरीर में सनसनी हो जाएगी और बस, कर देगा वो रेप. क्योंकि वो तो कुछ भी कर सकता है न! बलात्कार भी.

इन जनाब को तो इस बात का जवाब भी पता होगा कि छोटी-छोटी बच्चियां, बुज़ुर्ग महिलाएं और परदे में रहने वाली औरतें रेप का शिकार क्यों होती हैं? क्या वे भी सनसनी पैदा करती हैं. और ये कैसा पुरुष है, जो सनसनी होते ही उस औरत की इज्ज़त तार-तार कर देता है, जिसको शरीर ढंके रहने का उपदेश दिया करता है?

इब्राहीम कोदिजल साहब यहीं नहीं रुके. उन्होंने ये भी कहा कि पुरुष को एक से ज्यादा शादियां ज़रूर करनी चाहिए, अगर उसके पास पैसा हो. इसके पीछे लॉजिक भी है इनके पास.

ये साहब कहते हैं कि ‘अगर आप मुझसे पूछें कि इस्लाम में एक से ज्यादा शादी करने के लिए (पुरुषों को) क्यों कहा गया है, मैं कहूंगा, मान लीजिए एक पत्नी की तबीयत ख़राब है (पीरियड, वगैरह), तो वो सेक्स नहीं कर पाएगी. ऐसे में पति को सेक्स के लिए सेक्स वर्कर के पास जाना पड़ेगा. लेकिन सेक्स वर्कर के पास जाना तो इस्लाम में हराम है. इसलिए इस्लाम में दूसरी शादी जरूरी है. ताकि पुरुष सेक्स वर्कर के पास न जाए.’

ये मर्द औरतों को सेक्स की मशीन से ज़्यादा कुछ समझते हैं क्या? अगर पत्नी किसी वक्त सेक्स नहीं कर सकती तो भी उन्हें सेक्स की ज़रूरत इतनी शिद्दत से होती है कि उसकी भरपाई करने के लिए तत्काल प्रभाव से दूसरी औरत का शरीर चाहिए. नहीं तो वे सेक्स वर्कर के पास चले जाएंगे. और अगर वे कई शादियां कर भी लें लेकिन एक ही साथ सारी पत्नियां किन्हीं कारणों से सेक्स न कर पाएं, तो फिर वे क्या करेंगे? और फिर एक बात ये समझ नही आती कि महिलाओं को क्या सेक्स की इतनी ज़रूरत नहीं होती? क्या वो एक पुरुष के साथ सम्बन्ध निभाने की ब्रांड एम्बेसडर हैं? आखिर समाज को बचाने, रिश्तों को निभाने और घर को बनाने का सारा दारोमदार औरत के कन्धों पर ही है? अगर है तो ये पुरुष उन्हें मशविरे क्यों देते हैं?

सेक्स के अलावा क्या पत्नी के साथ कोई सम्बन्ध नहीं होता एक पति का? और अगर शारीरिक ज़रुरत है सेक्स, तो ये बात औरतों पर भी लागू होती होगी कि वो कई शादियां कर ले? एक स्त्री और एक पुरुष, जब दोनों को प्रकृति ने समान शारीरिक और सामाजिक ज़रूरतें दे रखी हैं तो नियम और शर्तें सिर्फ़ महिलाओं के लिए क्यों हैं?

औरत के शरीर को पुरुष घूरता है, उसके कपड़ों के भीतर आंखें घुसाकर उसका जिस्म टटोलता है और फिर उससे ही कहता है कि पूरे कपड़े पहनो, नहीं तो सनसनी होती है, जो मर्द को रेप करने को फ़ोर्स करती है और एक से ज्यादा शादियां करने को. आखिर ये किस टाइप की सनसनी है, जो कपड़े देखकर शुरू होती है और सिर्फ़ एक औरत से सम्बन्ध बनाकर खत्म नहीं होती?

Video source: The News Minute