6 साल की फ़िरदौस तो आपको याद होंगी ही, हां वही मुस्लिम बच्ची जिसने भगवद गीता सस्वर पाठ प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर, ये साबित कर दिया था कि धर्म और ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती. ओडिशा के केंद्रपाड़ा स्थित सोवनिया रेसीडेंशियल स्कूल में पढ़ने वाली फ़िरदौस, प्रतियोगता में हिस्सा लेने वाले करीब 55 बच्चों को मात देकर इस प्रतियोगिता की विजेता बनी थी.

छोटी सी उम्र में अपनी काबिलियत से देश के लाखों-करोड़ों लोगों का दिल जीतने वाली फ़िरदौस को लेकर एक बेहद चौंका देने वाली ख़बर सामने आई है. दरअसल, फ़िरदौस अब सोवनिया रेसीडेंशियल स्कूल का हिस्सा नहीं है. बच्ची के माता-पिता ने उसे सोवनिया स्कूल से बाहर निकाल लिया है. फ़िरदौस के माता-पिता ने ये फ़ैसला अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि समाज और रिश्तेदारों के दवाब में आ कर लिया है.

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इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए फ़िरदौस की मां आरिफ़ा ने बताया, 'मेरी बेटी कक्षा 1 में पढ रही थी. मेरे पति साउदी में काम करते हैं, जब मेरे पति को ये पता चला कि हमारे रिश्तेदार स्कूल में फ़िरदौस के गीता पढ़े जाने से बिल्कुल ख़ुश नहीं हैं, तो उन्होंने हमारे बेटे और बेटी को स्कूल से निकालने का आदेश दिया. आरिफ़ा ने ये भी बताया कि उनके रिश्तेदारों और धार्मिक नेताओं ने इस बात का विरोध जताया कि फ़िरदौस कुरान सिखने के बजाए,स्कूल में भगवद गीता पढ़ना सीख रही है.'

मामले पर बात करते हुए एक मौलवी ने कहा, सोवनिया रेसीडेंशियल स्कूल में बच्चों को ज़बरदस्ती गीता का पाठ पढ़ाया जा रहा था, ये पता चलते ही फ़िरदौस के माता-पिता ने उनके बच्चों को स्कूल से बाहर निकाल लिया. स्कूल में बच्चों को समान शिक्षा दी जाती है, लेकिन क्या स्कूल में धार्मिक शिक्षा देना सही था.'

अंत में आरिफ़ा कहती हैं कि 'मुझे अपनी बेटी पर गर्व है. मुझे इस बात की संतुष्टि है कि मेरी बेटी ने हिंदू धार्मिक ग्रंथ के पाठन में प्रथम स्थान हासिल किया.'