हम सब अपने घर को साफ़ रखने के लिए सारे जतन करते हैं. घर की सफ़ाई करने के बाद कूड़ा बाहर फेंक देते हैं. वैसे तो हमारे घर का कूड़ा लेने के लिए हर दिन सरकारी सफ़ाई कर्मचारी आते हैं. लेकिन अगर वो एक दिन नहीं आते हैं, तो हम परेशान हो जाते हैं और कूड़े को बाहर सड़क पर ही फेंक देते हैं, जो कि बहुत गलत है. ज़रा सोचिये अगर हम ऐसे ही अपने घर का कूड़ा सड़क पर फेंकते रहेंगे, तो सड़क पर कूड़ा ही कूड़ा दिखाई देगा और वही हवा के साथ हमारे घरों में भी वापस आएगा. जहां कूड़ा इकठ्ठा किया जाता है, उस इलाके से हम कैसे नाक पर कपड़ा रखकर निकलते हैं.

लेकिन अगर आपको 5 मिनट कचरे के बीच में खड़ा होना पड़े, तो आप रह नहीं पायेंगे. लेकिन आपको बता दें कि पिछले दो महीनों से लगातार नागालैंड के लोग गंदगी में रहे थे. इसके पीछे कारण यह था कि वहां की कूड़ा उठाने वाली गाड़ी ख़राब हो गई थी.

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नागालैंड की राजधानी Kohima से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित Pfutsero जिले में कचरा उठाकर ले जाने वाली गाड़ी खराब होने जाने की वजह से लोगों को कचरा फेंकने में बहुत ही दिक्कत हो रही थी. और उसे ठीक इसलिए नहीं कराया गया क्योंकि Pfutsero की नगर निगम सरकार जनवरी में ही हटा दी गई थी. और नागा आदिवासियों के महिला सशक्तिकरण आंदोलन की वजह से वहां पर नगर निगम के चुनाव दोबारा हो नही पाए थे.

आपने एक कहावत तो सुनी ही होगी कि जहां चाह होती है, वहां राह खुद-ब-खुद बन जाती है. शायद इसलिए Pfutsero के 28 वर्षीय Neingupe Maru, जो यहां के थाने में कांस्टेबलने हैं, ने इस तरह से कचरे में सांस लेना स्वीकार नहीं किया. उन्होंने सफ़ाई का ज़िम्मा अपने हाथों में लिया.

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इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी पुरानी मारुती वैन के द्वारा एक सफ़ाई अभियान अकेले ही शुरू कर दिया. जिले की गन्दगी को साफ़ करने के लिए Neingupe Maru, ने अपनी वैन को एक डम्पर में बदल दिया और पूरे जिले में चक्कर लगाना शुरू किया और उनको जहां भी कचरा दिखा उसे अपनी वैन में डालकर आगे बढ़ते गए.

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Hindustan Times के अनुसार, Neingupe Maru ने कहा, 'मैं इतनी अधिक मात्रा में शहर में कचरा एकत्रित होने की वजह से बहुत चिंतित था. मैं इसलिए और अधिक ज़्यादा चिंतित था कि इस तरह कूड़ा इकठ्ठा होता गया तो शहर में कई तरह की बीमारियां फैलने का ख़तरा बढ़ रहा था. कभी-कभी मैं सुबह जल्दी उठकर सडकों का कूड़ा साफ़ करता हूं, तो कभी शाम के वक़्त. ऐसा इसलिए क्योंकि कभी मेरी ड्यूटी सुबह की होती है, तो कभी शाम को.'

उन्होंने ये भी बताया कि आजकल तो कचरा साफ़ करने में हर दिन मात्र 3 से 4 चक्कर लगाया करते हैं, लेकिन शुरुआत में पूरे शहर की गन्दगी को साफ़ करने के लिए 21-21 बार जिले के चक्कर लगाने पड़ते थे.

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गौरतलब है कि Pfutsero की सफ़ाई के लिए Maru रोजाना एक घंटे ज्यादा काम करते हैं. मगर इस नेक और सबकी भलाई के लिए किये जा रहे काम के लिए उनको किसी भी तरह की आर्थिक मदद नहीं मिली है. अपनी गाड़ी में पेट्रोल भी वो अपने पैसों से ही डलवाते हैं.

आज के समय में जब हम अपने ख़ुद के मामलों की जिम्मेदारी लेने से कतराते हैं और दूर भागते हैं, हमें इस आदमी से बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत है. भारतवासी होने के नाते हमारा भी ये फ़र्ज है कि हम अपने आस-पास की जगह को साफ़ रखें और सड़क या सार्वजानिक स्थानों पर कूड़ा न फैलाएं.

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