ये कहानी शुरू हुई 2002-2003 में. बिहार के सासाराम के रेलवे स्टेशन पर छात्रों का एक ग्रुप जमा हुआ... किसी विरोध प्रदर्शन या तोड़-फोड़ या नशेबाज़ी के लिए नहीं... पढ़ाई के लिए.

रेलवे स्टेशन पर 24 घंटे बिजली उपलब्ध होती है और उसी का प्रयोग करने के लिए ये छात्र जमा हुए थे. दूर-दराज़ के गांव से छात्र इस सुविधा का फ़ायदा उठाते हैं और लैंप के नीचे पढ़ते हैं.

Source: Business Line

आज, 15-16 साल बाद यहां हज़ारों छात्र एकसाथ बैठकर पढ़ाई करते नज़र आते हैं. Business Line के मुताबिक, रेलवे, SSC और अन्य सरकारी-ग़ैरसरकारी परिक्षाओं की तैयारी करने के लिए ये छात्र इकट्ठा होते हैं. स्टडी ग्रुप का नाम है, 'Quiz'.

एक साथ मिलकर ये छात्र बिना कोई फ़ीस दिए पढ़ते हैं. ये छात्र न सिर्फ़ मिलकर पढ़ते-पढ़ाते हैं, बल्कि स्टडी-मटेरियल भी शेयर करते हैं. करेंट अफ़ेयर्स, गणित, रीज़निंग, भाषा के अलावा ये छात्र इंटरव्यू कैसे देना है ये भी सीखते हैं.

Business Line से बात करते हुए ज़िला रोहतस के कोचस के रहने वाले संतोष ने बताया,

प्रतियोगिता परीक्षाओं में इस तरह की तैयारी बहुत मदद करती है. मैं जिस भी परीक्षा में बैठने योग्य हूं, उस परीक्षा में बैठता हूं. हो सकता है पहली बार में परीक्षा पास न कर पाऊं, पर इससे अच्छा अनुभव मिल जाता है और हो सकता है अगली बार में एग्ज़ाम क्लियर कर लूं.
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'Quiz' का हिस्सा रह चुके संदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा,

इस तरह की कोचिंग न सिर्फ़ सहायक होती है, बल्कि नहीं पढ़ने वाले छात्रों को इसमें एंट्री नहीं मिलती है. अगर कोई छात्र हफ़्ते में 2 दिन भी बिना किसी उचित कारण के सेशन मिस करता है तो उसे बाहर कर दिया जाता है. छात्रों के Performance की लिस्ट भी लगती है.

संदीप का ये भी दावा है कि 'Quiz' में पढ़ने वाले हर छात्र ने कोई न कोई प्रतियोगिता परीक्षा पहले या फिर दूसरे प्रयास में ज़रूर निकाली है.

रेलवे कर्मचारी भी छात्रों की सहायता करते हैं. प्लेटफ़ॉर्म साफ़-सुथरा रहता है. The Telegraph के अनुसार, पटना रेल पुलिस एसपी, जीतेंद्र मिश्रा ने छात्रों को पहचान पत्र भी दिलवाए हैं, ताकि छात्र आराम से स्टेशन जा सकें.

Source: Telegraph India

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