झूठ.... बोलते सब हैं, बताता कोई नहीं. कोई बात-बात पर बोलता है तो कोई बिना बात के ही आदत से मजबूर होकर बोलता है. लोग सोचते हैं कि झूठ बोलने से बचकर निकला जा सकता है, पर ये उस वक़्त के लिए ही होता है. बाद में उस झूठ का हर्ज़ाना भरना ही पड़ता है.

अगर बचपन में ही इस आदत पर नियंत्रण कर लिया जाए तो बड़े होकर मुसीबतें कम हो सकती है. और ये तभी हो सकता है, जब माता-पिता बच्चे की इस आदि को बदलने के लिए प्रयास करें.

लेकिन किसी के झूठ को कैसे पकड़ा जाए? घर में दो बच्चों ने अगर मिलकर भी Ice cream ख़त्म की हो तो दोनों ही इंकार करेंगे. ऐसे में क्या किया जाए? झूठ तो झूठ ही है.ॉ

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थोड़ा बड़े होने के बाद ये आदत बड़ी-बड़ी मुसीबतों में बदल सकती है. कोई भी बच्चा ऐसी मुसीबतों में भी पड़ सकता है, जिससे उसका कोई लेना-देना ना हो. लेकिन झूठ बोलने की आदत के कारण वो दोषी साबित हो सकता है.

बचपन में Ice Cream की चोरी छोटी बात हो सकती है, पर Teenage में ये झूठ बोलने की आदत, पैसों की चोरी का इल्ज़ाम भी बन सकती है और ऐसे में मम्मी-पापा भी कुछ नहीं कर सकते.

Jerilee Claydon के अनुसार,

'अगली बार जब आपके बच्चे आपसे झूठ बोलें, तो ये सोचिये कि वो वही कहते हैं जो आप सुनना चाहती हैं. बच्चे हों या बड़े, वो झूठ तभी बोलते हैं, जब उन्हें ये पता होता है कि उनका सच काम नहीं आएगा.'

अब सवाल है कोई झूठ क्यों बोलता है?

जवाब काफ़ी सिंपल है. शर्म, Embarrassment से बचने के लिए. डांट को बहुत कम लोग ही Positive रूप में ले पाते हैं. सभी इसे Ego से जोड़ लेते हैं

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मम्मी-पापा के लिए सबसे मुश्किल सवाल, 'झूठ का पता कैसे लगाया जाए?'

Parenting आसान नहीं है, पर ज़रा सी असावधानी आपको आपके बच्चे से दूर कर सकती है.

Jerilee का मानना है कि बच्चों को सुधारने पर ध्यान देने वाले माता-पिता को सबसे पहले ख़ुद पर ध्यान देना चाहिए. ये सवाल माता-पिता को अपनेआप से पूछना चाहिए-

1. क्या घर का माहौल ऐसा है कि बच्चा खुलकर सच बोल सकें?

2. क्या बच्चे को पता है कि आप असल में क्या सुनना चाहते हैं?

3. क्या आप अपने बच्चों को सच की एहमियत बताने में सफ़ल हुए हैं?

अकसर मम्मी-पापा सच सुनने के बाद अपनेआप पर काबू नहीं रख पाते. सबसे पहले Parents को सच सुनने की हिम्मत जुटानी चाहिए और ये ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे को सच बोलने की सज़ा ना मिल जाए. बच्चों को सच बोलने के लिए Punishment नहीं, बल्कि Prize देना चाहिए.

एक और बात ये जाननी भी ज़रूरी है कि बच्चा झूठ बोल रहा है या नहीं, ये कैसे पता लगाएं?

इन Tips से आप सच और झूठ में फ़र्क कर सकते हैं-

1. Face Reading

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ये भ्रम है कि हर बंदा Face Reading नहीं कर सकता. बहुत कम लोग होते हैं, जो अपने Emotions छिपा लेते हैं. बच्चे तो बिल्कुल नहीं छिपा सकते. बच्चे के चेहरे और Body Language पर ध्यान दें. अकसर झूठ बोलते वक़्त बच्चे नज़रें चुराते हैं, कपड़े के कोने से खेलते हैं, उनके माथे पर बल पड़ने लगता है. या फिर पसीना भी आने लगता है.

2. बात बदलने पर सहज महसूस करना

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अगर किसी ने झूठ बोला है, तो बात बदल देने पर वो बहुत सहज महसूस करने लगता है. आप बात बदलकर भी बच्चे का Reaction देख सकते हैं. अगर उसका Reaction बदल जाए, तो समझ जाइये कि वो कुछ छिपा रहा है.

3. बातें करने का ढंग

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अगर बच्चा सच बोल रहा है, तो वो आराम से बातें करता है, हकलाता नहीं. लेकिन अगर वो झूठ बोल रहा है, तो वो साफ़ बातें नहीं कर पाता. वैसे

नियम हर बच्चे पर लागू नहीं होता, क्योंकि कई बच्चे Parents की डांट से पहले ही डर जाते हैं.

4. बच्चा एकदम से Aggressive हो जाए

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अगर बच्चे के स्वभाव में अचानक से फ़र्क आए, जैसे कि अगर कोई शांत स्वभाव का बच्चा एकाएक गुस्सा करने लगे, तो ये समझ जाना चाहिए कि मामला गड़बड़ है. अगर बच्चा Overreact करने लगे यानि कि वो कोई बात छिपा रहा है और बार-बार एक ही सवाल पूछे जाने से चिड़चिड़ा हो गया है.

5. Language

अगर कोई बच्चा झूठ बोल रहा है, तो वो एक सवाल का एक ही जवाब देगा. लेकिन अगर वो सच बोल रहा है, तो उसके शब्द बदल जाएंगे. झूठ रटा-रटाया होता है.

6. अजीबो गरीब हरकतें

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अगर कोई कहानी बयां करते हुए बच्चे अजीबोग़रीब हरकतें करने लगे, जैसा कि वो Normally नहीं करते, तो इसका मतलब है कि वो झूठ बोल रहे हैं.

याद रखें, गुस्से से किसी भी बात का हल नहीं निकलता. अपने बच्चे के साथ नर्मी से पेश आएं. माफ़ी मांग लेने से बड़ी-बड़ी समस्याएं सुलझ जाती हैं, पर आपके बच्चे को सच्चाई और माफ़ी की एहमियत का एहसास कराना आपकी ज़िम्मेदारी है.

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