भारत में कला, शिक्षा, उद्योग, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन आदि में उनके विशिष्ट योगदान को मान्यता देने के लिए भारत सरकार द्वारा भारतीय नागरिकों को पद्मश्री सम्मान दिया जाता है. भारत में लोगों को दिए जाने वाले सम्मानों में से ये चौथा सम्मान पुरस्कार है. तो ज़ाहिर सी बात है कि जिसको ये सम्मान मिलता है उसको ज़्यादातर जानते होंगे. लेकिन अभी हाल ही में एक पुलिसवाले ने पद्मश्री तीजन बाई को पहचानने से इनकार कर दिया. आपको बता दें कि पद्मश्री तीजन बाई छत्तीसगढ़ की मशहूर पंडवानी गायिका हैं.

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दरअसल, मामला ये था कि गनियारी गांव में तीजन बाई का घर बन रहा है. बीते मंगलवार को निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली वार्निस ख़त्म हो गई, तो उनका पीए खेमलाल नेताम बाइक से वार्निस लेने के लिए भिलाई जा रहा था. तभी सिरसा गेट चौक पर तैनात ट्रैफ़िक पुलिस ने खेमलाल को बिना हेलमेट के वाहन चलाते हुए पक़डा और ज़रूरी कागज़ात दिखाने को बोला. लेकिन उसके पास न ही हेलमेट था और न ही गाड़ी के कागज़. इसलिए पुलिस ने उसका 800 रुपये का चालान काट दिया.

तब खेमलाल ने पुलिस की बात तीजन जी से कराई, लेकिन पुलिस ने उनको पहचानने से इंकार कर दिया. कई बार बोलने के बाद भी पुलिस ने बाइक नहीं छोड़ी, तो खेमलाल ने किसी तरह से 300 रुपये का चालान कटाया और वापस आ गया.

मगर इस बात से तीजन बाई इतनी ज़्यादा दुखी हुईं कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर एक पुलिस वाला उन्हें नहीं जानता, तो क्या मतलब ऐसे पद्मश्री सम्मान का. इससे बेहतर है कि सम्मान को वापस लौटा दूं.

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़ोन पर पूरा परिचय देने के बाद भी ट्रैफ़िक पुलिस ने कहा कि आप जो कोई भी हों, मैं आपको नहीं जानता. गाड़ी का चालान कट चुका है, उसे थाने से छुड़वा लें. मगर इस बात से तीजन बाई इतनी ज़्यादा दुखी हुईं कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर एक पुलिस वाला उन्हें नहीं जानता, तो क्या मतलब ऐसे पद्मश्री सम्मान का. इससे बेहतर है कि सम्मान को वापस लौटा दूं.

इस बात पर ट्रैफ़िक डीएसपी, सतीश ठाकुर ने कहा, 'हम पद्मश्री तीजन बाई का बहुत सम्मान करते हैं. लेकिन उनके पीए खेमलाल नेताम के पास हेलमेट के साथ-साथ गाड़ी का इंश्योरेंस भी नहीं था और चालान कटने के बाद उसने तीजन जी से पुलिस की बात करवाई थी. हालांकि, पुलिस ने तो अपना काम पूरी इमानदारी से ही किया, पर तीजन बाई जी को पुलिस के कारण जो भी मानसिक पीड़ा हुई है, उसके लिए हमें खेद है.'

गौरतलब है कि तीजन बाई आज एक नाम नहीं, बल्कि पहचान हैं. देश-विदेश में प्रसिद्धि हासिल कर चुकीं लोक गायिका ने पंडवानी लोक कला को विश्व में पहचान दिलाई है. महाकाव्य महाभारत को कपालिक शैली पर मंच पर उतारने वाली पहली महिला तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की शान के रूप में पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है.

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