स्वतंत्रता दिवस के बाद एक फ़ोटो इंटरनेट पर बहुत वायरल हुई. फ़ोटो में थे कुछ बच्चे और शिक्षक, जो इस मौके पर बाढ़ के पानी में कमर तक डूबे हुए तिरंगे को सलाम ठोक रहे थे. ये तस्वीर नस्कारा प्राइमरी स्कूल की थी, जो असम के धुबरी ज़िले में है.

इस तस्वीर को लाखों लोगों ने शेयर किया, लेकिन जितना आप इस तस्वीर में देख पा रहे हैं, उससे ज़्यादा दुखदायक है इस तस्वीर के पीछे की कहानी. इस तस्वीर में दिख रहे टीचर मिज़ानुर रहमान को एक तरफ़ तो इस तस्वीर के लिए सराहा गया, लेकिन दूसरी तरफ़ उन्होंने अपने 18 कज़िन रशीदुल इस्लाम को इस बाढ़ में खो दिया.

चार शिक्षक और दो बच्चे इस तस्वीर में थे. ये दुखद हादसा झंडा फहराए जाने के कुछ घंटे बाद ही हुआ था. रहमान ने ही ये तस्वीर फ़ेसबुक पर डाली थी. इस तस्वीर को क्लस्टर रिसोर्स सेंटर कोऑर्डिनेटर के पास भेजा जाना था, जहां से ये ब्लॉक ऑफ़िसर को भेजी जाती.

इस बार सभी स्कूलों को अनिवार्य रूप से तिरंगा फहराने के लिए कहा गया था. इसके लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों को खतरा होने के बाद भी इसमें शरीक़ होना पड़ा. धुबरी क्षेत्र में 33 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए और 39 लोगों की जान चली गयी.

7 अगस्त को जारी किये गए सर्कुलर में कहा गया था कि स्वतंत्रता दिवस पर सभी स्कूलों में शपथ ली जाये कि 2022 तक ग़रीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद जैसी सामाजिक बुराइयों से देश को मुक्त किया जायेगा.

वायरल हुई तस्वीर में जो दो बच्चे दिख रहे हैं, उन्हें स्कूल ने इसलिए चुना था क्योंकि वो तैरना जानते थे. दस मीटर दूर उनके सहपाठी राष्ट्रगान गा रहे थे और संक्रमण के खतरे के बीच ये बच्चे बाढ़ के पानी में खड़े अपनी देशभक्ति का सबूत दे रहे थे.

रहमान ने एक फ़ेसबुक पोस्ट में लोगों को और मीडिया को धन्यवाद दिया है.

Source: Huffingtonpost