कुछ दिन पहले भले ही सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक़ या ट्रिपल तलाक़ को असंवैधानिक करार दे दिया हो, लेकिन भी लोगों पर इसका कोई ख़ास असर देखने को नहीं मिला है. आज की तारीख में भी लोग तीन बार तलाक़ बोलकर, लेटर में लिखकर, मेसेज या फ़ोन के ज़रिये अपने पार्टनर को तलाक दे रहे हैं. ऐसा ही एक मामला राजस्थान के जैसलमेर से सामने आया है.

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ये स्पीड पोस्ट के ज़रिये तलाक़ देने का ये मामला जैसलमेर के पोखरण का है. उत्तरप्रदेश के एक आदमी ने अपनी पत्नी को, जो अपने माता-पिता के साथ पोखरण पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले मांगलोई गांव में रहती है, को ये कहकर तलाक़ दे दिया कि वो ख़ूबसूरत नहीं है.

तलाक़ नामे के रूप में लिखा गया ये लेटर उर्दू में लिखा हुआ था, और इसे 1 सितम्बर को स्पीड पोस्ट द्वारा उत्तर प्रदेश से भेजा गया था. सूत्रों के मुताबिक़, ये लेटर कल्सुम, जो महिला के परिवार का एक सदस्य के नाम भेजा गया था, जो निरक्षर है और उर्दू पढ़ नहीं सकता. इसलिए ये लेटर अब्दुल अजीज ने पढ़ा था. लेटर के बारे में जानने के बारे में जानने के बाद परिवार के सभी सदस्य हैरान हो गए. महिला की फ़ैमिली अपनी बेटी के पति ख़िलाफ़ न्याय की मांग के साथ सख़्त कार्यवाई की मांग कर रही है. पीड़ित महिला के पिता छोटू खान ने कहा कि उनके पास ये लेटर ईद के दिन स्पीड पोस्ट से आया था.

मीडिया से बात करते हुए खान ने कहा, 'मेरे दामाद मोहम्मद अरशद ने अपनी पत्नी को शादी के ढाई साल बाद तलाक़ भेजा है. हालंकि, शुरुआत में तो सबकुछ ठीक था. लेकिन बाद में अरशद ने अपनी पत्नी से कहा कि वो उसे इसलिए पसंद नहीं है क्योंकि वो खूबसूरत नहीं है. यही नहीं इसके बाद अरशद ने पत्नी से मारपीट भी शुरू कर दी. खान ने कहा कि उन्होंने कई बार दोनों को समझाने की कोशिश भी की. 14 अगस्त को अरशद ने पोस्ट के ज़रिए तलाक नामा भेजा था, लेकिन वो उर्दू में था, तो खान उसे पढ़ पाए. बाद में अजीज ने लेटर पढ़ा और उनको तलाक़ के बारे में बताया.'

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एसपी गौरव यादव ने कहा कि अपराधी के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही तीन तलाक़ को अवैध करार देकर इस पर प्रतिबन्ध लगा चुकी है. दो दिन पहले पीड़िता ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया गया है. लेकिन उस वक़्त भी उसने ट्रिपल तलाक़ का कोई ज़िक्र नहीं किया था. अब ट्रिपल तलाक का मामला संज्ञान में आया है, अब इस मामले को उपयुक्त धाराओं के अनुसार इस शिकायत के साथ दर्ज किया जाएगा.

एक ओर जहां समाज के कई हिस्सों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक़ पर प्रतिबन्ध लगाने के फैसले का स्वागत किया है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो आज भी इस दकयानूसी रिवाज़ को अपने फायदे के लिए निभा रहे हैं हैं. जैसलमेर का ये मामला इसी का एक उदाहरण है.

Source: timesofindia