राजस्थान के उदयपुर में 5 साल से जानवरों की तरह रस्सी बंधे हुए 2 बच्चों को आज़ादी मिल गई है. उदयपुर से आई ये घटना बेहद दर्दनाक और मन को विचलित कर देने वाली है.

ग्रामीणों ने एक ओर जहां 8 साल के नेत्रहीन और मानसिक रूप से अस्वस्थ उमेश को बछड़े के खूंटी से बांध रखा था. वहींं दूसरी ओर बादी गांव के रहने वाले 11 साल के अपंग जिवा राम को पेड़ से बांध कर प्रताड़ित किया जा रहा था.

अब हम आपको बताते हैं कि आखिर ये पूरा किस्सा है क्या. दरअसल, करीब पांच साल पहले HIV रोग से ग्रसित होने के कारण उमेश के माता-पिता की मृत्यु हो गई थी. मां-बाप के जाने के बाद उमेश दिमाग़ी रूप से बीमार हो गया. घर के हालात ठीक न होने के कारण दादा-दादी उसका इलाज न करा सके, जिसके कारण दिन पर दिन उसकी दिमाग़ी हालत और ख़राब होती गई.

ग्रामीणों के मुताबिक, 'मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण उमेश कभी भी हिंसक रूप धारण कर, लोगों को मारना-पीटना शुरू कर देता था. कई बार घर छोड़ कर भागने की भी कोशिश करता था. उमेश की बिगड़ती हालत को देखते हुए ग्रामीणों ने उसे बछड़े के साथ वाली खूंठ में बांधने का फ़ैसला किया.'

वहीं दूसरी ओर 11 साल के जिवा के पिता 35 वर्षीय हर्मा राम पेशे से किसान हैं. हर्मा ने बताया, 'जिवा पोलियो से पीड़ित है और मानसिक रूप से बीमार भी किसान होने की वजह से मुझे खेतों में काम करने के लिए बाहर जाना पड़ता है और जिवा कई बार घर छोड़ कर भागने का प्रयास कर चुका है. इसी कारण खेतों में जाने से पहले उसे पेड़ से बांध कर जाना पड़ता था.

आसरा विकास संस्था के संस्थापक भोजराज सिंह बताते हैं, 'एक बच्चे को पड़ से और दूसरे के जानवरों के बीच बंधा देख मैं हैरान था. दोनों घटनाएं बेहद दर्दनाक और चौंका देने वाली है. जिवा नग्न शरीर के साथ पेड़ों से बंधा हुआ पाया गया. वहीं उमेश बांस की पल्ली से बछड़ों के बीच बंधा हुआ था.'

मानसिक और शारीरिक रूप से पीड़ित बच्चों को आश्रय गृह भेज दिया गया है, जहां उनके उपचार के साथ-साथ उनकी देखभाल भी की जा रही है.

Source : thesun