हमारे समाज में आज भी बहुत से लोगों का मानना है कि जो सुख बेटे दे सकते हैं, वो भला बेटियां नहीं दे सकती हैं. पर शायद वो ये भूल जाते हैं कि आज की लड़कियां लड़कों से किसी भी मामले में कम नहीं हैं. बेंगलुरु का ये किस्सा ऐसे ही लोगों के लिए एक सबक है. सीवी रघु आज अपनी दोनों बेटियों पर गर्व महसूस कर रहे हैं, क्योंकि अगर आज वो ज़िंदा हैं, तो सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी बेटियों की वजह से.

रघु पेशे से ज्वैलर हैं और Jayanagar के अशोका पिलर रोड पर उनकी Sri Chamundeshwari Jewellers नाम की एक शॉप भी है. ये हादसा बीते 21 मई का है. शाम को करीब 8 बजकर 16 मिनट पर हेलमेट पहने हुए एक शख़्स बिना जूते उतारे शॉप के अंदर घुस गया, तभी रघु ने उससे जूते बाहर उतारने के लिए कहा, इसके बाद वो बंदा चंद मिनट के लिए अकेले बाहर गया, लेकिन ठीक 8 बजकर 18 मिनट पर लौटा 5 गुंडों के साथ. सभी गुंडों ने हेलमेट और हाथों में गल्वज़ पहने हुए थे.

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इसे रघु की ख़ुशकिस्मती कहें या इत्तेफ़ाक कि घटना के वक़्त उनकी बेटी वैष्णवी भी वहां मौजूद थी और जैसे ही लुटेरे चाकू निकाल कर रघु पर हमला करने लगे, तुरंत वैष्णवी अपने पिता के बचाव के लिए कूद पड़ी. वहीं अपनी बहन और पिता को अकेले गुंडों से लड़ता देख रघु की दूसरी बेटी वैभवी भी सामने आ गई. बस फिर क्या था बेटी और पिता की जोड़ी ने गुंडों को परास्त कर दिया और वो बाइक पर सवार हो कर भाग निकले. हांलाकि, बीच-बचाव के दौरान रघु की उंगलियों में थोड़ी सी चोट ज़रूर आ गई. इसके साथ उन्होंने Siddapura पुलिस स्टेशन में मामले की शिकायत भी दर्ज कराई है. पुलिस को संदेह है इस घटना को अंजाम देने के लिए पहले से ही प्लान बनाया गया था. फिलहाल, पुलिस सीसीटीवी फ़ुटेज की मदद से अज्ञात बदमाशों की तलाश कर रही है.

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वहीं बड़ा हादसा टलने के बाद जान बचने के लिए रघु ने भगवान वेंकटेश्वर और उनकी बेटियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, 'भगवान की कृपा से हमने कुछ नहीं खोया.'

बेटे और बेटी में फ़र्क कुछ नहीं होता, बस अंतर हमारी नज़र का होता है. हमें इन दोनों जाबांज़ बेटियों पर गर्व है.

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