दिल्ली की एक लड़की जिसने अपनी जान देकर दो लोगों को जीवनदान दे दिया. इस मौत को हम साहसिक बिल्कुल नहीं कह सकते क्योंकि दिल्ली के छत्तरपुर में रहने वाली 19 वर्षीय शकुंतला ने आत्महत्या की है.

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अपने पिता से छोटी सी बहस के बाद 12वीं की छात्रा शकुंतला ने कीटनाशक दवाई पी ली थी. इसके बाद उसे उल्टी होने लगी और जब तक वो हॉस्पिटल पहुंचती, ज़हर के असर से उसका ब्रेन डेड हो चुका था. ब्रेन डेड होने पर इंसान बचता नहीं है.

दुनिया में पहली बार हुआ अनोखा ऑर्गन ट्रांसप्लांट

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शकुंतला, दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में थी, ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर ने शकुंतला के पिता मुकेश पंडित से शकुंतला की किडनियां दान करने की बात की. पिता मुकेश सदमे और शोक में थे, फिर भी उन्होंने डॉक्टरों का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. शकुंतला का परिवार गहरे सदमे में है, फिर भी उसके पिता को गर्व है कि उसकी वजह से दो लोगों की जान बच गई.

मुकेश ने TOI से बताया कि-

वो हमेशा क्लास में फ़र्स्ट आती थी. हमें भरोसा था कि वो हमारा नाम रौशन करेगी, पर ये हादसा हो गया.

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शकुंतला की एक किडनी सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती 39 वर्षीय महिला को लगाई गई जो, पिछले तीन साल से डायलिसिस पर थीं. ट्रांसप्लांट के बगैर वो दो साल से ज़्यादा जीवित नहीं रह सकती थीं. दूसरी किडनी राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती मरीज़ को लगी है. शकुंतला के लीवर पर ज़हर का असर था और दिल फ़ेल हो चुका था, जिसकी वजह से वो इस्तेमाल नहीं हो सके.

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भारत में करीब दो लाख मरीज़ों को आॅर्गन ट्रांसप्लांटेशन की ज़रूरत है, लेकिन 10% लोगों को भी आॅर्गन नहीं मिलते. कुछ ही हिम्मत वाले लोग हैं जो ऐसी स्थिति में अपने परिवारजन के अंगदान की इजाज़त देते हैं.

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