भारतीय सिनेमा या हिंदी फ़िल्म जगत एक दशक पहले जैसा था, आज वैसा नहीं है. एक दशक पहले हिंदी फ़िल्म जगत के लिए ये कहा जाता था कि यहां केवल कमर्शियल फ़िल्में ही बनाई जाती हैं.

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एक समय था जब हिंदी फ़िल्म जगत में कमर्शियल और समानांतर फ़िल्में दो अलग-अलग पटरी पर चलती थीं. लेकिन अब बॉलीवुड का अंदाज़ काफ़ी बदल गया है. अब धीरे-धीरे वो पटरियां नज़दीक आ रही हैं. इस बात को साबित करती हैं 2013 और 2015 में रिलीज़ हुई 'आंखों देखी'और 'मसान' फ़िल्मों की कहानी. इन दोनों फ़िल्मों में न ही हीरो की बॉडी बहुत मज़बूत दिखाई गई और न ही तड़कते-भड़कते आइटम सॉन्ग्स, लेकिन फ़िल्म की पटकथा मज़बूत थी, जो समाज को आईना दिखाने का काम कर रही थी. इन फ़िल्मों से ये बात तो साबित हो गई थी 10 लोगों को एक साथ ढेर कर देने वाला ही हीरो नहीं होता और उसी के दम पर ही फ़िल्में नहीं चलती हैं.

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शायद इसी बात को ध्यान में रखते हुए अब धनक (2016), वेटिंग (2016) मसान (2015) और आंखों देखी (2013) जैसी लीक से हटकर फ़िल्में बनाने वाले निर्माता अपनी अगली फ़िल्म 'रुख' लेकर आ रहे हैं. अगर उनकी पहले की फ़िल्मों को देखा जाए तो ये कहना गलत नहीं होगा कि इस फ़िल्म की कहानी भी समाज के किसी एक ख़ास पहलू को उजागर करेगी.

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फ़िल्म की कहानी एक लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक सड़क दुर्धटना में अपने पिता मौत के बाद उनकी सच्चाई पता लगाने की कोशिश करता है. मनोज बाजपेयी, कुमुद मिश्रा, आदर्श गोवरा और स्मिता तांबे इसमें मुख्य किरदारों में नज़र आ रहे हैं.

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अतनु मुखर्जी के निर्देशन में बनी ये फ़िल्म आपके नज़दीकी मूवी हॉल में 27 अक्टूबर को रिलीज़ होगी.

फ़िल्म का ट्रेलर रिलीज़ हो गया है, जिसमें साफ़ पता चल रहा है कि फ़िल्म में एक अर्थपूर्ण कहानी को बड़ी ही सहजता के साथ दिखाया गया है.

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