पाकिस्तान से फंसी, भारत की उज़मा अहमद, जब अपने देश में दाखिल हुई, तो उसने झुक कर भारत की मिट्टी को दिल से लगा लिया. घर लौट आने का सुकून उसके चेहरे पर साफ़ देखा जा सकता था.

22 वर्षीय उज़मा एक हिन्दुस्तानी नागरिक है, जो कुछ दिन पहले पाकिस्तान किसी से मिलने गयी थी, लेकिन उसे वहीं बंधी बना कर रख लिया गया. उसकी कहानी सुन कर किसी की भी रूह कांप जाएगी. बहुत बुरे हालातों में रहने के बाद, आख़िरकार अब वो अपने देश लौट आई है.

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उज़मा कुछ महीने पहले मलेशिया में ताहिर से मिली थी. ताहिर वहां टैक्सी चलाता था. उसे देख और उससे बातचीत कर, उज़मा को लगा था कि वो अच्छा इंसान है और अच्छे परिवार से ताल्लुख रखता है. ताहिर ने उसे अपने परिवार से मिलने के लिए पाकिस्तान बुलाया था. वो पाकिस्तान चली तो गयी, लेकिन वहां से लौट नहीं पा रही थी. ताहिर ने गोली दिखा कर उससे निकाह किया और अपने घर, बुनेर के एक गांव में ले गया.

उज़मा को पता चला कि ताहिर के पहले से चार बच्चे हैं. उसे वहां तरह-तरह की प्रताड़नाएं दी गयीं और उसका शोषण किया गया. उसे नशे की दवाइयां देकर उसका यौन शोषण भी किया गया.

उज़मा बताती है कि जिस गांव में वो थी, वहां हर घर में दो बीवियां होना आम था. हालात इतने बुरे थे कि हर दिन वहां गोलियां चलने की आवाज़ें सुनाई पड़ती थीं. उससे उसके दस्तावेज़ भी छीन लिए गए थे, ताकि वो भारत वापस न लौट सके.

कई दिनों तक ये सब सहने के बाद उसने वहां से निकलने के लिए एक योजना बनायी. वो बहाने से ताहिर को भारतीय दूतावास लेकर गयी. वहां पहुंच कर उसने अपनी आपबीती सुनाई और कहा कि वो ताहिर के साथ वापस नहीं जाना चाहती, अगर उसकी मदद नहीं की गयी, तो वो खुदखुशी कर लेगी.

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इस पर भारतीय दूतावास ने तुरंत एक्शन लेते हुए उसे शरण दी और उसे भारत वापस भेजने का इंतज़ाम किया गया. 12 मई को उसे कोर्ट में पेश किया गया.

पाकिस्तानी कोर्ट ने भी उसका पक्ष लेते हुए ताहिर से उसके दस्तावेज़ वापस दिलवाए. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उसे विश्वास दिलाया कि वो भारत की बेटी है, उसे वो वापस ज़रूर लायेंगी.

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अटारी बॉर्डर से उसे कड़ी सुरक्षा के साथ भारत वापस पहुंचाया गया. उज़मा के भाई वसीम अहमद ने भी इसके लिए सुषमा स्वराज का शुक्रिया अदा किया. उज़मा की पांच साल की बेटी है, जिसे देखते ही उज़मा ने उसे गले लगा लिया.

प्रेस कांफ्रेंस में उज़मा ने भी भारतीय हाई कमीशन और शुषमा स्वराज का आभार प्रकट किया. उज़मा ने कहा कि सुषमा स्वराज ने उसे एहसास दिलाया कि उसकी ज़िन्दगी की भी कोई कीमत है.

सुषमा स्वराज ने धन्यवाद देते हुए कहा कि दोनों देशों में तानाव होने के बावजूद, पाकिस्तानी न्यायपालिका ने उज़मा की घर वापसी में बड़ी भूमिका निभायी है.

उज़मा पर्स कांफ्रेंस में भावुक हो गयी और उसने माना कि भारत का नागरिक होना अपने आप में एक गर्व की बात है.

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