वर्सोवा बीच की सफ़ाई के बारे तो हम सबने सुना ही होगा, सराहना और वाहवाही के पुल भी बांधे. कई लेख लिखे गए, वीडियोज़ बनाए गए, Before After के Pic Posts भी बनाए. पर एक आम आदमी कदम भी उठाए तो आख़िर कब तक? माना कि लोकतंत्र में लोगों से तंत्र व्यवस्था चलती है, लेकिन सरकार का भी कुछ दायित्तव है इससे इंकार नहीं किया जा सकता.

वर्सोवा बीच की सफ़ाई का ज़िम्मा उठाने वाले अफ़्रोज़ शाह ने इस Cleanliness Drive पर रोक लगाने का निश्चय कर लिया है. वक़ील और ऐक्टिवस्ट अफ़्रोज़, सरकार के रवैये और भाड़े के गुंडों की गुंडई से तंग आकर उन्होंने ये निर्णय लिया.

अफ़्रोज़ ने ये सफ़ाई अभियान अक्टूबर 2015 में शुरू किया था और रिपोर्ट्स की माने तो वर्सोवा बीच से 5 मिलियन गंदगी की सफ़ाई कर दी थी.

अफ़्रोज़ के जज़्बे से प्रेरित होकर कई आम आदमी इस सफ़ाई अभियान से जुड़े. कई जानी-मानी हस्तियों ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया था.

ScoopWhoop से बात करते हुए अफ़्रोज़ ने बताया,

मैंने ख़ुद को और अपने देश को निराश किया है. हमने एक सोच के साथ इस कैंपेन की शुरुआत की थी. अगर हज़ारों Volunteers की मेहनत के बाद भी यही होना था तो मैं हार गया हूं.

अफ़्रोज़ का कहना है कि म्युनिसिपालटी वालों ने पिछले कुछ हफ़्तों में अपना काम नहीं किया.

अफ़्रोज़ ने आगे बताया,

ये 4-6 हफ़्तों से चल रहा है. हमारे JCB ट्रैक्टर चलाने वाले को कुछ गुंडे गंदी गालियां और धमकियां दे रहे हैं. अगर कुछ अच्छा करने का ये अंजाम होता है, तो ये सोचने की बात है कि आख़िर हमारा देश किस दिशा में जा रहा है?

अजब देश है हमारा, कोई अपने दम पर भी कुछ अच्छा करे तो भी अधिकारियों को कोई फ़र्क नहीं पड़ता. स्वच्छता अभियान वाले देश में ही Volunteers के साथ इस तरह का व्यवहार निंदनीय है.