आये दिन हम ऐसे किस्से सुनते रहते हैं कि मॉरल पुलिसिंग के नाम पर लोग दूसरों को परेशान करते हैं. ऐसा ही एक मामला केरल से सामने आ रहा है. केरल के एक नौजवान ने मॉरल पुलिसिंग के नाम पर प्रताड़ित किये जाने और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर डाले जाने के कारण आत्महत्या कर ली.

बीते गुरूवार को 25 वर्षीय अनीश ने अपने घर पर ही फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली. इस घटना के बाद मॉरल पुलिसिंग के नाम पर प्रताड़ित करने का ये मामला तूल पकड़ रहा है.

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सूत्रों के मुताबिक़, वैलेंटाइन डे के दिन यानि कि 14 फरवरी को अनीश को कुछ युवकों ने अजीक्कल बीच पर पकड़ लिया था. अनीश वहां ओपनी गर्लफ्रेंड के साथ वैलेंटाइन डे सेलिब्रेट करने के लिए गया था. तभी वहां 5 युवकों का एक ग्रुप भी पहुंच गया. उसके बाद मॉरल पुलिसिंग के नाम पर वो पांचों युवक अनीश और उसकी गर्लफ्रेंड को परेशान करने लगे. और उनके साथ मारपीट भी की. इतना ही नहीं इन आरोपियों ने अनीश और उसकी दोस्त का वीडियो भी बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. हालांकि, घटना सामने आने के बाद पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था.

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ख़बरों की मानें तो, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद से ही अनीश परेशान रहने लगा था. अनीश के परिवार वालों के अनुसार, इस घटना के बाद से ही अनीश मानसिक रूप से बहुत परेशान रहने लगा था. और इसी के चलते उसने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया. उन्होंने बताया कि अनीश ने पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराइ थी, लेकिन बावजूद इसके वो लोग उसे फेसबुक के ज़रिये लगतार प्रताड़ित कर रहे थे. इन्हीं सब बातों के चलते और समाज के डर से अनीश ने गुरुवार रात पलक्कड़ स्थित अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. अनीश के परिवारवालों ने इन पांचों दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

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इसके साथ ही आपको बता दें कि अनीश ने अपने सुसाइड नोट में दो आदमियों के नाम भी लिखे थे, जिनको पुलिस ने हत्या के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है. गौरतलब है कि केरल मानवाधिकार आयोग ने भी इस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया और रिपोर्ट मांगी है.

जो वीडियो सोशल मीडिया पर डाला गया था. उसमें साफ़-साफ़ पता चल रहा था कि कैसे पांचों आरोपी उनसे गन्दी भाषा में पूछताछ कर रहे हैं और वहीं अनीश उनसे विनती कर रहा है कि हमको जाने दो. इतना ही नहीं इन पांचों में से एक लड़के ने लड़की से पूछा, 'अगर कोई तुमसे कहेगा कि अपने कपड़े उठा दो, तो क्या तुम अपने कपड़े उठा दोगी'.

हालांकि, पुलिस ने अनीश की शिकायत पर पांच लोगों को गिरफ्तार तो किया था, लेकिन उनके ऊपर किसी तरह की कोई कार्यवाई नहीं की गई थी. जिससे उनका साहस और बढ़ गया और वो लोग बाद में भी अनीश को प्रताड़ित करने लगे.

केरल के डीजीपी लोकनाथ बेहरा ने फेसबुक पर एक स्टेटमेंट जारी कर कहा, 'यह घटना राज्य में आये दिन होने वाली 'मॉरल पुलिसिंग' के मामलों की बढ़ती संख्या में से ही एक है. कुछ घटनाओं में तो पुलिस ने ही खुद को मॉरल पुलिसिंग में बदल दिया था.'

पर सवाल यहां पर ये खड़ा होता है कि क्यों लोग किसी की ज़िन्दगी में दखल देने की कोशिश करते हैं? मॉरल पुलिसिंग के नाम पर किसी को इस हद तक परेशान कर देना कि उसके पास आत्महत्या जैसा कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प ही न बचे, कहां तक सही है? ये कैसी नियत है मॉरल पुलिसिंग के नाम पर खुद को सभ्य समाज का हिस्सा मानने वालों की? क्यों नहीं इनको भी अनीश की तरह फांसी पर नहीं लटका दिया जाता है? इनको किसने दिया है लोगों को सुधारने और उनकी ज़िन्दगी में दखलंदाजी करने का अधिकार? आप लोगों की इस पर क्या राय है कमेंट करके ज़रूर बताएं.

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