माना जाता है कि वीडियो गेम मानसिक तनाव कम करने के लिए एक बेहतरीन इलाज होता है. साथ ही ये ​व्यक्ति के Reflex Action को बेहतर करता है. लेकिन नई रिसर्च के अनुसार, जो ज़्यादा वीडियो गेम खेलते हैं, उनमें, स्किज़ोफ्रेनिया, PTSD और अल्ज़ाइमर जैसे रोगों का ख़तरा बढ़ जाता है.

अगर आप या आपका कोई करीबी एक्शन वीडियो गेम का कुछ ज़्यादा ही शौकीन है, तो उसे इन बीमारियों को ख़तरा हो सकता है.

Source- Vuze

Universite de Montreal में रिसर्चर Greg West ने अपनी रिसर्च में पाया है कि जो लोग ज़्यादा एक्शन वीडियो गेम खेलते हैं, उनके दिमाग के एक मुख्य हिस्से 'Hippocampus' में ग्रे मैटर कम होता है. Hippocampus में जितना ग्रे मैटर कम होता है, उतनी ही डिप्रेशन और इन दीमागी बीमारियों का ख़तरा ज़्यादा होता है. वीडियो गेम के कई फ़ायदे बताए जाते हैं, जैसे जिन्हें Visual Attention या भूलने की दिक्कत होती है, उनके लिए ये काफ़ी लाभदायक होते हैं.

Greg ने जब कई गेमर्स और नॉन गेमर्स के दिमाग की स्कैनिंग की तो पाया कि ग्रे मैटर की मात्रा गेमर्स के मुकाबले नॉन गेमर्स में ज़्यादा होती है. Hippocampus का आकर समुद्री घोड़े जैसा होता है और ये व्यक्ति को ख़ुद की पहचान करने में और अपने पूर्व अनुभवों को याद करने में मदद करता है. Hippocampus में जितना ज़्यादा ग्रे मैटर होगा, उतना ज़्यादा दिमाग स्वस्थ होगा.

Hippocampus के अलावा दिमाग का दूसरा ज़रूरी भाग होता है 'Striatum'. Striatum का Caudate Nucleus इंसान को रिलैक्स करने में मदद करता है. ये उन चीज़ों पर ध्यान देता है, जो काम के अलावा इंसान के ख़ुश रखने के लिए ज़रूरी हैं. जैसे खाना, पीना, सेक्स आदि.

गेम खेलते वक़्त 85 % गेमर्स, नैविगेशन के लिए Caudate Nucleus पर निर्भर होते हैं. इससे Caudate Nucleus ज़्यादा काम करता है और Hippocampus कम. अंत में Hippocampus, Cells और Atrophie खो देता है. जो लोग Dementia, स्किज़ोफ्रेनिया, PTSD, डिप्रेशन और अल्ज़ाइमर जैसे रोगों से ग्रसित होते हैं, उनमें ग्रे मैटर कम होता है और उन्हें वीडियो गेम नहीं खेलना चाहिए.

Source- Hindustan Times