बचपन में एक कविता पढ़ी थी, 'यमराज की दिशा'. कवि की मां उन्हें हमेशा दक्षिण की तरफ़ पैर करके सोने से मना करती थी, क्योंकि उनके अनुसार वो यमराज की दिशा है. न कवि को ये बात समझ आई थी और न ही मुझे. कविता के अंत में कवि ने कहा कि आज जिधर देखो उधर, हर दिशा में यमराज के आलीशान महल बन गए हैं.

आज के संदर्भ में ये कितनी सही बात है न? जिधर देखो मौत ही मौत है. सड़क पर निकलो तो मौत, घर में रहो तो भी मौत. कहीं धर्म के नाम पर, तो कहीं भूख के नाम पर मौत.

अब ये बताओ, क्या ये बच्चा याद है?

Source- Medium

तस्वीर तो होगी ही दिमाग़ में, सोशल मीडिया पर शेयर भी की होगी. ये Alan Kurdi है. 3 साल की उम्र में इसे इतनी दर्दनाक मौत मिली, जिसके बारे में हम उम्रदराज़ सोच भी नहीं सकते. उसकी ग़लती? सिर्फ़ इतनी कि वो सीरिया में पैदा हुआ और एक अच्छी ज़िन्दगी की तलाश में उसके पिता उसे किसी सुरक्षित जगह पर ले जा रहे थे.

क्या ये बच्चा है ज़हन में?

Source- The Guardian

सीरिया के ऐलेप्पो में बमबारी के बाद 5 वर्षीय ओमरान दकनीश को मलबे से निकाला गया.

आपको पता है हर रात जब हम अलार्म सेट करके सुबह उठने का इंतज़ाम करते हैं, वहीं एक ऐसा देश भी है जिसके लोग ये सोचते हैं कि उन्हें ज़िन्दगी का अगला पल जीने को मिलेगा या नहीं.

जब हम आप दफ़्तर से घर लौटकर, आराम से सोफ़े पर बैठकर चाय की चुस्कियों के साथ टीवी पर मसाला ख़बरें देखते हैं, तो उस देश में लोग अपने बच्चों को एक आसान ज़िन्दगी न दे पाने के लिए सिसकियां भरते हैं.

हम बात कर रहे हैं सीरिया की. सीरिया में पिछले सात सालों से संघर्ष चल रहा है. पिछले 7 साल मैंने और आपने इत्मिनान से बिताये होंगे. पढ़ाई-नौकरी और फिर आगे की ज़िन्दगी. पर सीरिया के बाशिंदों पर पल-पल मौत मंडराती रही है. वक़्त-बेवक़्त इस देश में बमबारी की जाती है. सत्ता के नशे में चूर विकसित देश सीरिया को समस्या घोषित कर चुके हैं और उस देश की भलाई का दावा भी करते आये हैं. पर सवाल है कैसी भलाई? जिन बच्चों ने अभी तक ठीक से ज़िन्दगी शुरू भी नहीं की, उन्हें मौत के घाट उतारकर?

UN द्वारा वहां के लोगों को राहतकोष मुहैया भी करवाया जा रहा है, पर इसका ढिंढोरा ज़्यादा पीटा जाता है और ज़मीना तौर पर बहुत कम काम होता है.

सीरिया में है घौता. किसी समय एक आम शहर की तरह सांस लेने वाला घौता आज नरक बन चुका है. शैतान के हथियारों के रूप में रूस की मिसाइलें, फ़ाइटर प्लेन यहां लगातार बमबारी कर रहे हैं. रूस की दिलेरी देखिये, Abc.net की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने बमबारी में 5 घंटों की रियायत देने का कदम उठाने का फै़सला किया.

इस देश के बाशिंदों की क़िस्मत देखिये, बाहर के देश तो बाहर के देश, यहां की ख़ुद की सरकार भी अपने ही नागरिकों के लिए मौत बन बैठी है. 5 दिनों तक सीरिया सरकार ने घौता क्षेत्र में बमबारी की. ये बमबारी बृहस्पतिवार को ख़त्म हुई और इन 5 दिनों में इस क्षेत्र में 400 लोग मारे गए, जिनमें 150 बच्चे थे.

Daily Mail की एक रिपोर्ट के अनुसार, घौता में अब लाशें दफ़नाने के लिए जगह भी नहीं मिल रही. मौत के बाद भी किसी के साथ ऐसा सुलूक, क्या आप ऐसी किसी अवस्था की कल्पना भी कर सकते हैं?

बहुत से माता-पिता चादरों में लिपटी अपने बच्चों की लाशों को लेकर 2 गज़ ज़मीन के लिए दर-दर भटक रहे हैं.

और हम सब दुनियावाले इतने बेकद्र, बेफ़िक्र बैठे हैं. क्या सरहदें इतनी ताकतवर हो गईं हैं कि बेकसूर बच्चों का ख़ून इस दुनिया के सत्ताधारियों को नज़र नहीं आता. सत्ताधारी तो यूं भी कुर्सी के मोहताज हैं, पर हम आम लोगों को क्या हुआ है कि हमें किसी का भी दर्द नज़र नहीं आता. पैसा कमाने, दीवारें बनाने में हम इतने मशगूल हो गये हैं कि हमें ये भी नहीं दिख रहा कि हम नफ़रतों की दीवारें और चौड़ी करते जा रहे हैं?

हम भी इतने बेबस हैं कि टाइप करने और 1 घंटे की परिचर्चा के अलावा उन मासूम ज़िन्दगियों के लिए कुछ नहीं कर सकते. कुछ कर सकते हैं तो ऑनलाइन कैंपेन में दान, पर वो भी ज़रूरतमंदों तक पहुंचेगी या नहीं पता नहीं.

Images- Daily Mail