'बेवफ़ा चाय वाले' और 'MBA चाय वाले' की स्टोरी तो आप सुन और पढ़ ही चुके होंगे. इस बार हम आपके लिए एक फ्रेश और झन्नाटेदार स्टोरी लेकर आये हैं. इस बार स्टोरी एक 'कचौड़ी वाले' की है. कचौड़ी वाला भी ऐसा वैसा नहीं, बल्कि ये जनाब 'MBA फ़ेल' कचौड़ी वाले हैं. लगता है इन जेंटलमैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात सीरियसली ले ली.

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MBA Fail Kachori Wala
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'MBA फ़ेल कचौड़ी वाला' नाम सुनने में ही थोड़ा क्रिएटिव सा लगता है. अब आपके दिमाग़ में चल रहा होगा कि ये इतने सारे 'MBA फ़ेल' और 'MBA पास' वाले ये सिंगल लौंडे आख़िर आ कहा से रहे हैं? क्या ये सिर्फ फ़ेमस होने का ज़रिया है या फिर इसके पीछे एक ख़ास मकसद है? ख़ैर औरों का तो पता नहीं, लेकिन 'MBA फ़ेल कचौड़ी वाले' की कहानी में सच्चाई है, मेहनत है और कुछ कर दिखाने का जज्बा भी है.  

MBA Fail Kachori Wala
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कौन है ये 'MBA फ़ेल कचौड़ी वाला'?  

ये जनाब यूपी के फ़र्रुखाबाद के रहने वाले हैं. इनका नाम सत्यम मिश्रा है. सत्यम ने साल 2018 में कासगंज के 'हजरत निजामुद्दीन डिग्री कालेज' बीएससी की थी. इसके बाद बरेली के किसी संस्थान में MBA में दाखिला ले लिया, लेकिन परिवार की ख़राब आर्थिक स्थिति के चलते पढ़ाई पर ध्यान न दे सका और पहले ही सेमिस्टर में फ़ेल हो गया. सत्यम के घरवालों के पास इतना पैसा नहीं था कि आगे की पढ़ाई पूरी कर सके. इसलिए कुछ दिन इधर उधर भटकने के बाद जब कहीं कोई नौकरी नहीं मिली तो सत्यम ने 'कचौड़ी का ठेला' लगाने का फ़ैसला किया.

Satyam Mishra
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सत्यम ने सबसे पहले फ़र्रुखाबाद की आवास विकास कालोनी में कमरा किराए पर लिया. इसके बाद शहर के 'लोहिया प्रतिमा' के पास 'कचौड़ी का ठेला' लगाने का फ़ैसला किया. इस दौरान सत्यम ने अपने MBA के सपने को ज़िंदा रखने के लिए ठेले का नाम 'MBA फ़ेल कचौड़ी वाला' रखना बेहतर समझा. आज इसी अनोखे नाम की वजह से न चाहते हुए भी लोग उनके ठेले की तरफ़ खींचे चले आते हैं.

Satyam Mishra, MBA Fail Kachori Wala
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पीएम मोदी के बात से हुए प्रेरित  

सत्यम पिछले क़रीब 2 महीने से कचौड़ी का ठेला लगा रहा है. इस दौरान भतीजा नितिन मिश्रा भी उनका साथ दे रहा है, जो हाईस्कूल फ़ेल है. सत्यम का कहना है कि उन्होंने 'कचौड़ी का ठेला' लगाने का ये फ़ैसला पीएम नरेंद्र मोदी के उस बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि, 'कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता अगर आप बेरोज़गार हैं और परिवार चलाने के लिए आपको पकौड़े भी बेचने पड़े तो इसमें कोई बुराई नहीं है'. सत्यम ख़ुद कहते हैं कि उन्हें ये काम करने में कोई शर्म नहीं है.

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हर महीने कमाता है 10 हज़ार रुपये

फ़र्रुखाबाद की आवास विकास कालोनी में स्थित 'MBA फ़ेल कचौड़ी वाले' का ये ठेला बेहद कम समय में बेहद पॉपुलर बन चुका है. इस दौरान ग्राहकों को पेमेंट में दिक्कत न हो इसलिए ऑनलाइन पेमेंट का ऑप्शन भी है. इसके अलावा आप आराम से बैठकर कचौड़ी का आनंद लेना चाहते हैं तो इसकी सुविधा भी है. ग्राहक पकौड़े खाने के साथ ही सत्यम के साथ सेल्फ़ी भी लेते हैं. सत्यम आज कचौड़ी बेचकर हर महीने 10 हज़ार रुपये तक कमा लेते हैं.

सत्यम की 4 बहनें और एक बड़ा भाई है. बड़ा भाई शिवदत्त मिश्रा दिल्ली में नौकरी करता है. 3 बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि एक बहन और सत्यम अब भी अविवाहित हैं. बड़ा परिवार होने की वजह से आर्थिक स्थिति भी कुछ ठीक नहीं, लेकिन अब वो कचौड़ी बेचकर अपने परिवार को संभाल रहा है. दुकान से अच्छी कमाई हुई तो सत्यम फिर से MBA में दाखिला लेना चाहता है.

सत्यम मिश्रा आज उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो नाकामयाबी से हार माकर घर बैठ जाते हैं. 

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