हैलो जी! कैसे हैं आप? कुछ लेंगे चाय या कॉफी? मैं!? ओजी मैं रायचंद्स की फ़ैमिली के बहुत क्लोज़ रही हूं...रायचंद्स तो याद होंगे न आपको? अरे वही, यशवर्धन और उसकी छोटी-सी बीबी, जो स्टूल पर चढ़कर टाई बांधती थी. उसका आदर्श बेटा राहुल और झल्ली बहू अंजली. और मेरा फेवरेट रोहन बाबा (जो अब मेरा सबसे बड़ा दुश्मन है). और उसकी बीवी Poo भी है.

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अंजली के चांदनी चौक वाले घर के पास ही मेरा घर है. मैंने अपनी बेटी की शादी में भी बुलाया था न आपको...अरे अब तक नहीं पहचाना? वैसे तो मेरा नाम साइदा है, लेकिन सब प्यार से मुझे दाई जान बुलाते हैं.

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अब तो याद आ गई मैं? वो पेस्टल कलर्स के सूट्स में रायचंद्स के घर में घूमती थी न. कभी ख़ुशी कभी गम तो आपने देखी ही होगी और उसके बड़े फैन भी होंगे, लेकिन ये सुखी परिवार, सिर्फ बाहर से दिखता है, अंदर की असलियत मैं आपको बताती हूं. वो तो मेरे लिए दूसरे घर जैसा ही था. हां, लेकिन अभी यशवर्धन से पूछोगे तो वो मना कर देगा.

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खैर, मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी इन लोगों के आगे-पीछे घूमने में लगा दी. पर इन्होंने मेरी इस सेवा का कोई तोहफ़ा मुझे कभी नहीं दिया. देते कहां से, ये सनकी परिवार तो अपने ड्रामों में ही उलझा रहता था. अपने आगे तो इन्हें और कुछ नज़र ही नहीं आता. आज मैं आपको इन लोगों की सच्चाई बताती हूं...

मैंने ही रोहन बाबा को उनके बचपन से संभाला है. घर का काम करने के साथ-साथ रोहन बाबा की भी पूरी ज़िम्मेदारी मुझ पर ही थी. और हां, उन्हें लड्डू बनाने में भी मेरा ही हाथ है. मैं तो इस मोटे को खिला-खिला कर परेशान हो गई थी, शू-लेस भी नहीं बांध पाता था ये अपनी और अब देखो बाहर जाकर कैसा हो गया है...धत तेरे की, मेरी सारी मेहनत बर्बाद कर दी. क्या-क्या सपने देखे थे मैंने इसके लिए. इतना तो मैंने अपनी बेटी के लिए भी नहीं किया.

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कुछ साल पहले शादी थी ना उसकी...अरे रुख़सार की...मैंने बहुत पैसे खर्च किए थे, लेकिन इस यशवर्धन ने मेम साहब को आने ही नहीं दिया. उसका स्टेट्स जो खराब हो जाता इससे. खैर, अच्छा हुआ कि बुड्ढे ने राहुल को भेज दिया. कम से कम उसने गा-नाच कर मेरे थोड़े पैसे बचा लिए.

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अब ये इतने अमीर लोग हैं, तो मैंने सोचा वो मेरे पड़ोस वाली अंजली का भी थोड़ा भला कर दूं, इसलिए मैंने उसे अपनी दुकान की मिठाई लाने को कहा. हाय अल्लाह! वो मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती थी. उसने वहां इत्ता महंगा वास तोड़ दिया. अगले दिन सॉरी बोलने गई तो एक और वास की बलि चढ़ा दी. वो तो निकल ली सॉरी बोल कर, पर मेम साहब ने पैसे तो मेरी सैलेरी से ही काटे न.

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इस परिवार ने मेरा जीना हराम कर रखा था, अब बदला तो लेना ही था मुझे इन सनकियों से. मैंने भी एक चाल चली और राहुल बाबा और अंजली की सेटिंग करवा दी. फिर? अरे, फिर क्या था राहुल बाबा को मोगैम्बो यशवर्धन से बहुत डांट पड़ी और उसने उन्हें घर से निकाल दिया.

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राहुल बाबा लंदन जा बसे और उनके साथ मैं भी. आखिर कब तक मैं उस थकेले घर में पिसती रहती. लंदन में मेरे मज़े थे. दिनभर अंग्रेज़ों की खिट-पिट सुनो और अंजली से उनकी गॉसिप करो.

हां, लंदन आकर पूजा ज़रूर बदल गई थी. क्या हुआ नहीं पहचाना? अरे, Poo की बात कर रही हूं मैं...चांदनी चौक में बालों में तेल लगाकर घूमती थी ये, आज देखो स्टाइल मार कर कॉलेज की हीरोइन बनी फिर रही है. कुछ काम नहीं करती है ये घर पर. सब कुछ मुझे और अंजली को ही करना पड़ता है. इसके कपड़े देखकर राहुल चिढ़ता रहता है, Sexist कहीं का...कम तो ये भी बिल्कुल नहीं है. लंदन में आकर भी मुझे रुपयों में ही सैलरी देता है...कंजूस!

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और राहुल का बेटा कृष...उसके बारे में तो पूछो मत...दिनभर अंग्रेज़ी में गिटर-पिटर कर कूल बनने की कोशिश करता रहता है और हमारी पड़ोस वाली लड़की को पटाने के चक्कर में है! लेकिन वो इससे पटने वाली नहीं है. ऐबला जो है ये. आख़िर अपने स्कूल के फ़ंक्शन में नेशनल एंथम कौन गाता है भला? पर ये उसने सिखाया था ना... वही मेरा दुश्मन रोहन....हे भगवान, इस लड़के से तो नफ़रत है मुझे...पता नहीं ये वापस क्यों आ गया? आदर्श बेटा बन कर अपने बड़े भाई को वापस घर ले जाने आया था.

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मेरे इतने सालों की मेहनत इसने मिट्टी में मिला दी. ये लड्डू तो आस्तीन का सांप निकला...मैंने इसे खिला-पिला कर इतना बड़ा किया और इसने मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी...मुझे फिर से लंदन से चांदनी चौक ले आया...झंडू बाम कहीं का...

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खैर, छोड़ो अब क्या कहें....ये हैं मेरे करम, कभी ख़ुशी कभी गम....